Video: 22 महीने बाद खुल गया मणिपुर, सड़कों पर चलीं गाड़ियां, कुकी समुदाय ने किया रास्ता ब्लॉक

Manipur Free Traffic Movement: मणिपुर में 22 महीने के बाद फिर से गाड़ियों की आवाजाही शुरू हो गई. लेकिन कई जगहों पर कुकी समुदाय के लोगों ने रास्ता रोक रखा था, जिसके बाद सुरक्षा बलों के साथ झड़प हुई.

Manipur Free Traffic Movement: मणिपुर में 22 महीने बाद कुकी और मैतेई समुदाय के इलाकों में लोगों की आवाजाही शुरू हो गई. इस दौरान भारी संख्या में सुरक्षाबल तैनात थे. कुछ जगहों पर विरोध प्रदर्शन भी किए गए और रास्ते रोक दिए गए थे. कुकी समुदाय के लोगों ने रास्ते पर टायर जलाकर फ्री ट्रैफिक मूवमेंट का विरोध किया. उनका कहना था कि वो अपने इलाके से मैतेई समुदाय के लोगों को जाने नहीं देंगे.

कुछ जगहों पर फिर भड़की हिंसा, सुरक्षा बल ने मामला किया शांत

फ्री ट्रैफिक मूवमेंट के दौरान मणिपुर के कुछ इलाकों में थोड़ी-बहुत हिंसा भड़की. जिसके बाद सुरक्षा बल ने मामले को शांत कराया. इस दौरान कुछ लोग घायल भी हुए. सोशल मीडिया में कई वीडियो वायरल हो रही हैं, जिसमें सुरक्षा बलों की तैनाती में मणिपुर स्टेट ट्रांसपोर्ट की बस दिख रही है. उसके आगे पीछे भारी संख्या में सुरक्षा बल के जवान दिख रहे हैं. कुकी सुमदाय की महिलाओं ने रास्ता रोका तो जवानों को थोड़ा बल प्रयोग करना पड़ा.

गृह मंत्री अमित शाह ने 8 मार्च से फ्री ट्रैफिक मूवमेंट का दिया था आदेश

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सुरक्षा बलों को 8 मार्च से मणिपुर में सभी मार्गों पर लोगों की मुक्त आवाजाही सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था. उन्होंने फ्री ट्रैफिक मूवमेंट का विरोध और बाधा उत्पन्न करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया था. शाह के आदेश के बा शनिवार को अंतर-जिला बस सेवाएं फिर से शुरू हुईं.

इंफाल पश्चिम में मैतेई लोगों का शांति मार्च रोका गया

मणिपुर के इंफाल पश्चिम जिले में शनिवार को मैतेई संगठन द्वारा आयोजित शांति मार्च को इसलिए रोक दिया गया क्योंकि यह प्रदर्शन फ्री ट्रैफिक मूवमेंट के दिन हो रहा था. सुरक्षा बलों ने इंफाल से लगभग 18 किलोमीटर दूर सेकमई में फेडरेशन ऑफ सिविल सोसायटी ऑर्गनाइजेशन द्वारा निकाले गए जुलूस को रोक दिया और आयोजकों से सरकार की मुक्त आवाजाही पहल में शामिल होने को कहा. पुलिस अधिकारियों ने कहा, “अगर वे मुक्त आवागमन पहल में भाग लेना चाहते हैं, तो वे सरकार द्वारा व्यवस्थित वाहनों से जा सकते हैं.” सुरक्षा बलों के रोकने पर मैतेई समुदाय के लोगों ने कहा, “मार्च का उद्देश्य राज्य में शांति लाना है. अगर सरकार लोगों की मुक्त आवाजाही की अनुमति देने की स्थिति में नहीं है, तो घोषणा करने की क्या जरूरत है?”

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लेखक के बारे में

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभालने के साथ-साथ एक पूरी शिफ्ट का नेतृत्व (Shift Lead) भी कर रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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