मालवीय नगर हादसा : होटल के मालिक को 4 दिन की पुलिस रिमांड में भेजा गया, मृतकों को मिलेगा 10-10 लाख मुआवजा

Malviya Nagar Fire : दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में जिस छह मंजिला होटल में आग लगी, वह नियमों के खिलाफ चल रहा था. जानकारी के अनुसार इस होटल को दो मंजिले की ही इजाजत थी. आग लगने की इस घटना में 11 विदेशी नागरिक सहित 21 लोगों की जलने से मौत हुई है. होटल के मालिक को गिरफ्तार किया गया है और प्राथमिकी दर्ज की गई है.

Malviya Nagar Fire : दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में बुधवार को लगी आग के बाद होटल के मालिक लवकेश बजाज को बृहस्पतिवार को साकेत कोर्ट में पेश किया गया. कोर्ट ने आरोपी लवकेश बजाज को चार दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है. आग की घटना में कुल 21 लोगों की मौत हुई है.

दिल्ली सरकार ने 10-10 लाख मुआवजे की घोषणा की

दिल्ली सरकार मरने वालों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये और गंभीर रूप से घायलों को 5-5 लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की है. इससे पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता मैक्स अस्पताल पहुंची थीं और घायलों से मुलाकात की थी. मैक्स अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार मैक्स हॉस्पिटल, साकेत कॉम्प्लेक्स में अभी कुल 15 मरीज भर्ती हैं. इनमें से 13 विदेशी मरीज हैं. इन मरीजों में से 6 मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट पर हैं. वेंटिलेटर पर रखे गए सभी मरीजों में सुधार के संकेत दिख रहे हैं और उनकी हालत स्थिर है. अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार कोई भी मरीज बहुत गंभीर स्थिति में नहीं है. हालांकि, अलग-अलग मरीजों में चोटों का प्रकार और गंभीरता अलग-अलग होती है, खासकर उस मरीज के मामले में जिसकी कल स्पाइन सर्जरी हुई थी. अस्पताल की ओर से यह बताया गया है कि सभी मरीजों की रेगुलर मॉनिटरिंग की जा रही है.

विदेशी नागरिकों की लिस्ट विदेश मंत्रालय को सौंपी गई

मालवीय नगर हादसे में मारे गए 21 नागरिकों में से 11 विदेशी नागरिक हैं, जिनकी सूची विदेश मंत्रालय को सौंप दी गई है.दिल्ली पुलिस ने विदेश मंत्रालय को मारे गए नागरिकों की सूची सौंपने के बाद कहा कि आगे की कार्रवाई मंत्रालय करेगा. नागरिकों की पहचान और डीएनए प्रोफाइलिंग से जुड़ी दूसरी फॉर्मैलिटीज के लिए संबंधित दूतावास दिल्ली पुलिस के संपर्क में हैं. होटल में रहने वाले एक विदेशी नागरिक ने बताया कि मैं वेस्ट अफ्रीका के गिनी से हूं. मैं पिछले दो महीनों से फ्लॉरिश स्टेज में रह रहा था. मैं और मेरे पिता यहां पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज कराने आए हैं. उन्हें शनिवार को मैक्स हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. जब होटल में आग लगी तो हम यहां नहीं थे. इस होटल में मेरे बहुत से दोस्तों की मौत हो गई. मेरा एक नाइजीरियाई दोस्त अपनी मां का इलाज कराने यहां आया था. दोनों की मौत हो गई. दो लोग कांगो से थे.

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Published by: Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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