लॉकडाउन के बाद से 19 मई तक सड़क दुर्घटनाओं में 438 लोगों की मौत, जानें इसमें से कितने हैं प्रवासी मजदूर

lockdown migrant labour,road accident : देशव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद से घर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों का सड़कों पर हुजूम आपको भी नजर आता होगा. लेकिन घर पहुंचने से पहले बीच रास्ते में ही उनमें से कई को कभी वाहनों ने टक्कर मार दी, कभी उनके वाहन पलट गये या दो गाड़ियों के बीच टक्कर में उनकी मौत हो गयी, या कभी पटरियों पर रेलगाड़ी से कट कर मौत हो गयी. मंगलवार को भी इन प्रवासियों के लिए हादसों वाला दिन साबित हुआ.

देशव्यापी लॉकडाउन लागू होने के बाद से घर लौटने वाले प्रवासी मजदूरों का सड़कों पर हुजूम आपको भी नजर आता होगा. लेकिन घर पहुंचने से पहले बीच रास्ते में ही उनमें से कई को कभी वाहनों ने टक्कर मार दी, कभी उनके वाहन पलट गये या दो गाड़ियों के बीच टक्कर में उनकी मौत हो गयी, या कभी पटरियों पर रेलगाड़ी से कट कर मौत हो गयी. मंगलवार को भी इन प्रवासियों के लिए हादसों वाला दिन साबित हुआ. आज सुबह से तीन हादसों की खबर आयी है. पहली खबर महाराष्ट्र के सोलापुर से आयी जहां झारखंड आ रही बस के ड्राइवर समेत चार लोगों की सड़क हादसे में मौत हो गयी है, जबकि 15 लोग घायल हैं.

मंगलवार को दूसरी खबर उत्तर प्रदेश के महोबा से आयी जहां एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ. इस सड़क हादसे में 3 प्रवासी मजदूरों की मौत हो गयी और 12 लोग घायल हो गये हैं. वहीं बिहार के भागलपुर में मंगलवार को एक भीषण सड़क हादसा हुआ. नवगछिया राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर अंभो गांव के समीप विपरीत दिशा से आ रहे ट्रक और बस के टक्कर में 9 लोगों की मौत हो गयी है. ये सभी मजदूर पूर्वी चंपारण के रहने वाले हैं.

सेव लाइफ फाउंडेशन ने एक आंकडा सामने लाया

देश में सड़क हादसों में कमी लाने पर काम कर रहे गैर-लाभकारी संगठन सेव लाइफ फाउंडेशन ने एक आंकडा सामने लाया है. इस संगठन के अनुसार 25 मार्च को लॉकडाउन शुरू होने के बाद से 19 मई सुबह 11 बजे तक लगभग 1,246 सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं, जिनमें 438 लोगों की मौत हुई है और 902 लोग घायल हुए. अपने घरों को लौट रहे 167 प्रवासी, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति करने वाले 29 लोग और 242 अन्य लोगों की मौत हुई. यहां आपको बताते चलें कि ये आंकड़े मीडिया में छप रहीं खबरों और सेव इंडिया फाउंडेशन द्वारा किये गये सत्यापन पर आधारित हैं.

इन घटनाओं पर एक नजर डालें

औरेया सडक हादसा: बीते शनिवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे उत्तर प्रदेश के औरेया में राजमार्ग के निकट एक दुर्घटना हुई, जहां राजस्थान की ओर से आ रहा ट्रक दिल्ली की ओर से आ रहे डीसीएम वैन से टकरा गया. दुर्घटना में कम से कम 24 लोगों की मौत हो गयी और 37 अन्य घायल हो गये थे. अधिकारियों के अनुसार मृतकों में अधिकतर लोग बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के निवासी से थे.

14 मई की दुर्घटना : बीते 14 मई की देर रात उत्तर प्रदेश के जालौन और बहराइच में दो अलग-अलग सड़क दुर्घटनाओं में तीन प्रवासी मजदूरों की मौत हो गयी, जबकि 71 अन्य घायल हो गये थे.

13 और 14 मई के बीच: 13 और 14 मई को तीन अलग-अलग हादसों में 15 मजदूरों की मौत हुई थी. उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक बस से कुचलकर छह प्रवासी मजदूरों की मौत हो गयी थी, वहीं चित्रकूट में ट्रक की टक्कर से एक मजदूर ने अपनी जान गंवा दी थी. इसी तरह मध्य प्रदेश में बस की टक्कर से ट्रक में सवार आठ प्रवासी श्रमिकों की मौत हुई थी.

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मध्य प्रदेश के सागर में हुई दुर्घटना: मध्य प्रदेश के सागर में भी ऐसी ही दुर्घटना हुई, जब मजदूरों को महाराष्ट्र से उत्तर प्रदेश जा रहा ट्रक सागर-कानपुर रोड पर पलट गया. इस दुर्घटना में छह श्रमिकों की जान गयी थी.

10 मई का हादसा : 10 मई को हैदराबाद से आम से लदे ट्रक पर सवार होकर यूपी लौट रहे छह प्रवासी मजदूरों की मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर के पास मौत हो गयी थी.

9 मई का हादसा : 9 मई की सुबह मध्य प्रदेश के शहडोल और उमरिया जिलों के 16 प्रवासी श्रमिकों की मालगाड़ी से कटकर उस वक्त मौत हो गयी थी जब वे औरंगाबाद के पास एक रेलवे ट्रैक पर सो रहे थे.

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

Published by: Prabhat Khabar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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