शपथग्रहण के दूसरे दिन कर्नाटक के मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने दिया इस्तीफा, CM डीके शिवकुमार ने कहा-हम समस्या सुलझा लेंगे

Ramalinga Reddy : कर्नाटक में असंतोष का स्वर तब उभरा है, जब पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी दोनों ही बेंगलुरु में मौजूद हैं. डीके शिवकुमार के कैबिनेट से इस्तीफा, उनके शपथग्रहण के महज दो दिन बाद हुआ है. इस स्थिति को संभालना डीके शिवकुमार के लिए एक चुनौती है.

Ramalinga Reddy : कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही असंतोष उभरकर सामने आने लगा है. डीके शिवकुमार ने 3 जून को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है और 5 जून को उनके कैबिनेट के एक मंत्री रामलिंगा रेड्डी ने कर्नाटक के मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है. रामलिंगा रेड्डी ने कर्नाटक मंत्रिमंडल में विभागों के बंटवारे पर नाराजगी जताते हुए शुक्रवार को मंत्री पद से इस्तीफा देने की घोषणा की.

रेड्डी ने कहा कि उन्होंने किसी खास विभाग की मांग नहीं की थी .जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी नेतृत्व द्वारा राजी किए जाने पर या उन्हें मनचाहा विभाग दिए जाने पर वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करेंगे, तो रेड्डी ने दृढ़ता से नहीं में जवाब दिया. वरिष्ठ नेता ने कहा कि इस घटनाक्रम से निराश होने के बावजूद उन्हें किसी भी नेता के प्रति कोई व्यक्तिगत द्वेष नहीं है. उन्होंने कहा, मुझे सिद्धरमैया से कोई नाराजगी नहीं है. मुझे शिवकुमार से कोई नाराजगी नहीं है.मुझे खरगे से कोई नाराजगी नहीं है. मुझे आलाकमान से कोई नाराजगी नहीं है.

विभागों के बंटवारे से नाखुश हैं रामलिंगा रेड्डी

शुक्रवार को रामलिंगा रेड्डी ने एक प्रेस वार्ता की जिसमें उन्होंने अपने इस्तीफे की घोषणा की. गौरतलब है कि बुधवार को मुख्यमंत्री पद की शपथ के बाद बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने मंत्रियों के बीच विभागों के बंटवारे की घोषणा की. विभागों के बंटवारे से रामलिंगा रेड्डी नाराज हैं. उन्होंने कहा कि वह बेंगलुरु विकास विभाग चाहते थे, लेकिन उन्हें बड़ी और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का विभाग सौंप दिया गया. रेड्डी ने कहा कि मैं अपने पद से इस्तीफा दे रहा हूं क्योंकि मैं अपनी अंतरात्मा के विरुद्ध जाकर काम नहीं कर सकता. उन्होंने कहा कि मैं इस अपमान को सहन नहीं कर सकता हूं, इस्तीफे के अलावा मेरे पास विकल्प ही क्या है.रेड्डी ने पत्रकारों से कहा कि डीके शिवकुमार ने मुझे दो बार फोन किया और मुझे बेंगलुरु विकास विभाग देने का वादा किया, लेकिन अंत में वह किसी और को मिल गया. मुझे दुख हुआ है, अतः आज मैं इस्तीफा दे रहा हूं.हालांकि, उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस में बने रहेंगे और विधायक पद पर रहेंगे.

डीके शिवकुमार ने कहा- हम समस्या को सुलझा लेंगे

कर्नाटक के मंत्री रामलिंगा रेड्डी के इस्तीफे पर मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है. वह बहुत अच्छे दोस्त हैं. हम कैबिनेट में सबसे करीबी दोस्त हैं, इसलिए हम समस्या सुलझा लेंगे. रामलिंगा रेड्डी मेरे साथी और हमारे सीनियर लीडर हैं. उन्होंने कहा कि वह गांव जाकर काम नहीं कर सकते. उन्होंने कहा कि मुझे उन्हें कोई और मिनिस्टर का पद देना चाहिए. मैं रामलिंगा रेड्डी से बात करूंगा और सब ठीक कर दूंगा.

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By Rajneesh Anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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