JNU: बहस, चर्चा, असहमति के बीच देश निर्माण की सोच जरूरी

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक मूल्यों का साथ-साथ विकास होना चाहिए. बहस, चर्चा, असहमति और टकराव भी एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए जरूरी है, लेकिन इसमें भी मूल्यों का पालन होना चाहिए.

JNU: शिक्षा सिर्फ डिग्री तक सीमित नहीं होनी चाहिए. शिक्षा का मकसद चरित्र निर्माण, बुद्धि को सुदृढ़ करने और व्यक्तियों को आत्मनिर्भर बनाने पर होना चाहिए. नालंदा और तक्षशिला जैसे प्राचीन शिक्षा केंद्रों से लेकर उपनिषद और भगवद् गीता, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और तिरुवल्लुवर के तिरुक्कुरल ने भारतीय धर्मग्रंथों और प्राचीन पुस्तकों ने निरंतर शिक्षा को सामाजिक और नैतिक जीवन को प्रमुखता दी है. सही शिक्षा आचरण और चरित्र का निर्माण करती है और यह केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं है. 
सोमवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(जेएनयू) के 9 वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने यह बात कही.

आधुनिक विज्ञान और पारंपरिक मूल्यों का साथ-साथ विकास होना चाहिए. जेएनयू के लोकतांत्रिक मूल्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि बहस, चर्चा, असहमति और टकराव भी एक स्वस्थ लोकतंत्र के जरूरी है. लेकिन इसमें भी मूल्यों का पालन होना चाहिए. जेएनयू के समावेशी वातावरण और छात्र प्रवेश तथा संकाय भर्ती दोनों में समानता और सामाजिक समावेश को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि उभरते और सभ्यतागत क्षेत्रों में विश्वविद्यालय ने संस्कृत और भारतीय अध्ययन संकाय में हिंदू, जैन और बौद्ध अध्ययन के नए केंद्रों की स्थापना की है. तमिल अध्ययन के विशेष केंद्र और असमिया, ओडिया, मराठी और कन्नड़ में पाठ्यक्रमों और प्रोग्राम जैसी पहलों के जरिये भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने का भी काम किया जा रहा है.  


डिग्री का उपयोग राष्ट्र निर्माण में करने की जरूरत


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि जेएनयू समय से आगे सोचने वाले संस्थान रहा है. जेएनयू की अपनी एक समृद्ध विरासत है और कई विभिन्न क्षेत्रों में रिसर्च को बढ़ावा देने का काम किया है. संस्थान का शैक्षणिक वातावरण, नेतृत्व को आगे लाने की पहल का बड़ा केंद्र रहा है. इस संस्थान से पढ़े डीपी त्रिपाठी, कॉमरेड सीताराम येचुरी, कॉमरेड प्रकाश और मौजूदा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने देश को नयी दिशा देने का काम किया है. कई पूर्व छात्रों ने देश निर्माण में योगदान दिया है. 

उन्होंने कहा कि जेएनयू में बहस, चर्चा और विरोध की जीवंत संस्कृति रही है और यह देश का एक प्रमुख बौद्धिक केंद्र रहा है. जहां विचारों को परखा और विकसित किया जाता है. शिक्षा मंत्री ने कहा कि जेएनयू की डिग्री केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक जिम्मेदारी है. इस संस्थान से पढ़े छात्र विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं. इस दौरान जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कुलाधिपति कंवल सिब्बल, कुलपति प्रोफेसर शांति श्री धुलिपुडी पंडित, वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

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By Vinay Tiwari

Vinay Tiwari is a contributor at Prabhat Khabar.

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