भारत अब रूस से तेल नहीं खरीदेगा… अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे पर विदेश मंत्रालय का बयान सामने आया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि देश के 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरत को पूरा करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है. पेट्रोलियम प्रोडक्ट की खरीद को लेकर भारत इसी नीति पर चलता है. गुरुवार को विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि “जहां तक भारत की ऊर्जा खरीद का सवाल है, सरकार ने कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कहा है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है.” उन्होंने कहा “बाजार की स्थितियों और बदलती अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के हिसाब से अपनी ऊर्जा खरीद में बदलाव लाना, यह सुनिश्चित करने की हमारी रणनीति का मुख्य हिस्सा है. भारत के सभी कदम इसी बात को ध्यान में रखकर उठाए जाते हैं और भविष्य में भी इसका अनुसरण किया जाएगा.”
विदेश मंत्रालय ने क्या कहा?
मीडिया के एक सवाल का जवाब देते हुए MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा “वेनेजुएला ऊर्जा क्षेत्र में व्यापार और निवेश दोनों ही तरह से हमारा दीर्घकालिक साझेदार रहा है. हम 2019-20 तक वेनेजुएला से ऊर्जा और कच्चे तेल खरीदते थे. फिर इसे रोकना पड़ा. इसके बाद हमने 2023-24 में वेनेजुएला से तेल खरीदना फिर शुरू किया था, लेकिन प्रतिबंधों के फिर से लागू होने के बाद हमें इसे रोकना पड़ा. ऊर्जा सुरक्षा के प्रति अपने दृष्टिकोण के अनुरूप, भारत वेनेजुएला सहित किसी भी कच्चे तेल की आपूर्ति के व्यावसायिक लाभों का पता लगाने के लिए तत्पर है.”
टैरिफ कम करने के लिए पीएम मोदी ने ट्रंप को दिया धन्यवाद
रणधीर जायसवाल ने यह भी बताया कि “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से टेलीफोन पर बातचीत की है. प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति ट्रंप को टैरिफ कम करने के लिए धन्यवाद दिया. प्रधानमंत्री ने कहा कि अब भारत में बने उत्पादों का निर्यात अमेरिका को 18% के कम शुल्क पर किया जाएगा. यह व्यापार समझौता अमेरिका को हमारे निर्यात को बड़ा बढ़ावा देगा. इससे भारत में श्रम प्रधान उद्योगों को बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, और हमारे लोगों के लिए विकास और समृद्धि आएगी. अमेरिकी पक्ष ने भी स्पष्ट किया है कि शुल्क की अंतिम राशि 18% है.”
किसी भी देश से तेल खरीदने के लिए भारत स्वतंत्र- रूस
इससे पहले बुधवार (4 फरवरी) को रूस की ओर से बयान आया था कि भारत किसी भी देश से कच्चा तेल खरीदने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने एक सवाल के जवाब में कहा “हम और अन्य अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा विशेषज्ञ इस बात से भली-भांति परिचित हैं कि रूस, भारत को तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति करने वाला एकमात्र देश नहीं है. भारत हमेशा से अन्य देशों से भी ये उत्पाद खरीदता रहा है, इसलिए हमें इसमें कुछ भी नया नजर नहीं आता.” (इनपुट भाषा)
