मौसम विभाग ने पत्तनमथिट्ठा, कोट्टायम, इडुक्की, एर्णाकुलम, कोझिकोड, वायनाड, कन्नूर और कासरगोड में 24 घंटे में 20 सेंटीमीटर से अधिक भारी बारिश की चेतावनी दी है। इसके अलावा, 4 जिलों—अलप्पुझा, त्रिशूर, पलक्कड़ और मलप्पुरम में 'ऑरेंज अलर्ट' तथा तिरुवनंतपुरम और कोल्लम में 'येलो अलर्ट' जारी किया गया है.
कासरगोड में सबसे अधिक बारिश, निचले इलाके डूबे
आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सबसे अधिक 121.5 मिलीमीटर बारिश कासरगोड के बायार में दर्ज की गई. कन्नूर, कोझिकोड और एर्णाकुलम में भी भारी बारिश हुई है. अलप्पुझा, पत्तनमथिट्टा, कोट्टायम और कोझिकोड के निचले और तटीय इलाकों में पानी भर जाने से लोगों को अपने घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ रही है. इस बाढ़ में कई लोगों के जरूरी दस्तावेज और बच्चों की पढ़ाई की सामग्री बह गई है.
नदियों का जलस्तर चेतावनी निशान के पार
बारिश के कारण मुवाट्टुपुषा और तोडुपुषा नदियां चेतावनी के स्तर से ऊपर बह रही हैं. सुबह 8 बजे मुवाट्टुपुषा का जलस्तर 11.60 मीटर (चेतावनी स्तर: 10.92 मीटर) और तोडुपुषा का जलस्तर 11.50 मीटर (चेतावनी स्तर: 10.78 मीटर) दर्ज किया गया. हालांकि, राहत की बात यह है कि अब नदियों के जलस्तर में धीरे-धीरे गिरावट आ रही है. प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और तटवर्ती इलाकों के निवासियों को सतर्क रहने को कहा गया है.
सरकार और प्रशासन की ओर से राहत कार्य
आपदा की इस घड़ी में राज्य सरकार ने प्रभावितों की मदद के लिए कई बड़े फैसले लिए हैं:
- दस्तावेजों के लिए विशेष अदालतें: राज्य के पर्यटन मंत्री पीसी विष्णुनाथ ने बताया कि बाढ़ में खो चुके जरूरी कागजात को दोबारा बनवाने के लिए विशेष अदालतें लगाई जाएंगी.
- बच्चों को मिलेगी अध्ययन सामग्री: सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि जिन बच्चों की स्कूल की किताबें बह गई हैं, उन्हें नई पाठ्यपुस्तकें और अध्ययन सामग्री तुरंत मिले.
- सफाई और वित्तीय मदद: प्रभावित वार्डों में सफाई कार्य के लिए फिलहाल 25,000 की राशि मंजूर की गई है, जिसमें स्वयंसेवी संगठन भी मदद कर रहे हैं.
- आर्थिक सहायता: मुख्यमंत्री ने घोषणा की है कि जिन लोगों ने अपने घर या आजीविका खो दी है, उन्हें बिना किसी देरी के वित्तीय सहायता दी जाएगी.
