MSME को मजबूत करने के लिए सरकार 20,000 करोड़ इंवेस्ट करेगी, 14 खरीफ फसलों के लिए एमएसपी तय

Government will invest 20,000 crores to strengthen MSME MSP fixed for 14 kharif crops : केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज कैबिनेट की बैठक के बताया कि एमएसएमई को मजबूत करने के लिए सरकर इस क्षेत्र में 20,000 करोड़ इंवेस्ट करेगी. कैबिनेट की बैठक में 14 खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दी गयी.

नयी दिल्ली : केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज कैबिनेट की बैठक के बताया कि एमएसएमई को मजबूत करने के लिए सरकर इस क्षेत्र में 20,000 करोड़ इंवेस्ट करेगी. कैबिनेट की बैठक में 14 खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को मंजूरी दी गयी.

सूचना प्रसारण मंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि किसानों को लागत से कम से कम 50 से 83 प्रतिशत तक ऊंचा मूल्य मिलेगा. सरकार ने 2020-21 के लिए धान की एमएसपी 53 रुपये बढ़ाकर 1,868 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है. इस बात की जानकारी कृषि मंत्री ने दी.

उन्होंने बताया कि सरकार ने 2020-21 के लिए कपास की एमएसपी 260 रुपये बढ़ाकर 5,515 रुपये प्रति क्विंटल कर दी है. धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1868प्रति क्विंटल तय किया गया है, जबकि ज्वार का 2620 प्रति क्विंटल, बाजरा का 2150 प्रति क्विंटल तय किया गया है. रागी, मूंग और सोयाबीन के न्यूनतम समर्थन मूल्य में 50 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है.

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने बताया कि कैबिनेट ने एमएसएमई के लिए दो पैकेजों को लागू करने के लिए इसके रोड मैप को मंजूरी दे दी है. जिन्हें ज्यादा नुकसान हुआ है वैसे एमएसएमई के लिए 20,000 करोड़ रुपये का पैकेज दिया जायेगा.

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प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि सरकार ने मध्यम उद्यमों के लिए टर्नओवर की सीमा को 250 करोड़ रुपये में संशोधित किया है और निवेश की सीमा को बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये कर दिया गया है.

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रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.

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