Goldy Brar : जिंदा है गोल्डी बराड़, अमेरिकी अधिकारियों ने मौत की खबर को बताया झूठ

Goldy Brar : पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या का मास्टर माइंड गोल्डी बराड़ अभी मरा नहीं जिंदा है. इस बात की पुष्टि अमेरिकी अधिकारियों ने की है.

Goldy Brar : गोल्डी बराड़ अभी जिंदा है, यह दावा अमेरिका के अधिकारियों ने किया है. बुधवार को ऐसी सूचना आई थी कि गोल्डी बराड़ की मौत हो गई है. मीडिया ने बुधवार को अमेरिकी न्यूज एजेंसी के हवाले से यह सूचना दी थी कि गोल्डी बराड़ की अमेरिका में गोली मारकर हत्या कर दी गई है. फ्रेस्नो पुलिस विभाग की ओर से यह कहा गया है कि आप अगर इस बात पर भरोसा कर रहे हैं कि गोलीबारी में गोल्डी बराड़ की मौत हो गई है, तो यह सूचना कल है. टाइम्स आॅफ इंडिया ने इस खबर को अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से प्रकाशित किया है.

सिद्धू मूसेवाला के मर्डर का है मास्टरमाइंड

गौरतलब है कि गोल्डी बराड़ को पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला के मर्डर केस का मास्टरमाइंड माना जाता है, मूसेवाला की हत्या के बाद उसने खुद हत्या की जिम्मेदारी ली थी. उसके बाद से गोल्डी बराड़ यानी सतिंदरजीत सिंह लगातार चर्चा में है, उसे भारत सरकार ने आतंकवादी घोषित किया है. 30 वर्षीय गोल्डी बराड़ अभी कनाडा में रहता है. उसका जन्म पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में हुआ है. उसके माता-पिता वहीं के रहने वाले हैं. उसके पिता पुलिस में काम करते थे. गोल्डी बराड़ पर कई हत्या की जिम्मेदारी लेने, नेताओं को धमकाने एवं कई फिरौती मांगने का आरोप लग चुका है. उसपर कई तरह के संगीन अपराध में शामिल रहने का आरोप है.

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रेड काॅर्नर नोटिस

गोल्डी बराड़ के खिलाफ इंटरपोल ने रेड काॅर्नर नोटिस पहले ही जारी किया है. उसके खिलाफ 2022 में लुक आउट सर्कुलर जारी किया गया था . गोल्डी बराड़ लाॅरेंस बिश्नोई गिरोह का प्रमुख सदस्य है. लाॅरेंस बिश्नोई ने हाल ही में एक्टर सलमान खान के घर के बाहर फायरिंग करवाई थी. फायरिंग के मामले में गिरफ्तार अनुज थापन ने बुधवार को जेल में आत्महत्या कर ली थी. यह जानकारी मुंबई पुलिस ने दी थी.

इंटरनेट पर ट्रेंड कर रहा है गोल्डी बराड़

बुधवार को जब उसकी मौत की खबर आई तो वह ट्रेंड करने लगा था, अब जबकि उसकी मौत की खबर झूठी साबित हो गई है, इंटरनेट पर गोल्डी बराड़ टाॅप ट्रेंड में है और उसपर कई मीम्स बन पर रहे हैं. यूजर मीम्स बना कर मजे ले रहे हैं.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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