बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में गैर हिंदुओं की एंट्री बैन पर गरमाया मुद्दा, मुस्लिम संगठन ने जताई आपत्ति

Gangotri Dham Row: उत्तराखंड में बद्रीनाथ, केदारनाथ और गंगोत्री में अब गैर हिंदुओं का प्रवेश वर्जित हो जाएगा. हालांकि, चार धामों में से एक यमुनोत्री मंदिर समिति ने अभी इस बारे में कोई फैसला नहीं लिया है. बद्रीनाथ केदारनाथ मंदिर समिति ने इस विषय पर आम सहमति बना ली है और जल्द ही इस पर बोर्ड की बैठक में निर्णय ले लिया जाएगा जबकि गंगोत्री मंदिर समिति ने निर्णय कर लिया है. इधर यह मुद्दा अब गरमाता जा रहा है. इसपर मुस्लिम संगठन का रिएक्शन भी आने लगा है. तो आइये जानते हैं उनकी क्या प्रतिक्रिया है?

Gangotri Dham Row: गंगोत्री धाम विवाद पर मुस्लिम संगठन बंटे हुए नजर आ रहे हैं. कुछ नेताओं ने गैर हिंदुओं के प्रवेश पर बैन को चरमपंथी सोच करार दिया है, तो कुछ नेताओं ने इस फैसले को सही ठहराया है.

फैसला चरमपंथी सोच : मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा- कुछ सांप्रदायिक सोच वाले लोगों ने भारत में एक अजीब माहौल बना दिया है. जब भी कोई हिंदू त्योहार या मेला शुरू होता है, तो पहले से ही एक साइनबोर्ड लगा दिया जाता है, जिसमें लिखा होता है कि मुसलमानों को आने की इजाजत नहीं है. हाल ही में, गंगोत्री धाम में कमेटी ने ऐलान किया कि मुसलमानों को आने नहीं दिया जाएगा. अब केदारनाथ और बद्रीनाथ में भी यही कदम उठाने की योजना बन रही है. ऐसे काम और भावनाएं चरमपंथी सोच को बढ़ावा देती हैं और उन लोगों को ताकत देती हैं जो देश को कमजोर करना चाहते हैं, हिंदू-मुस्लिम भाईचारे को खत्म करना चाहते हैं और समाज में फूट डालना चाहते हैं. ये लोग समाज के दुश्मन हैं.

मंदिर कमेटी के फैसले पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए : डॉ इमाम उमर अहमद इलियासी

ऑल इंडिया इमाम ऑर्गनाइजेशन के चीफ इमाम डॉ इमाम उमर अहमद इलियासी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा- यह धर्म का मामला है, और धर्म का अपना महत्व है. अगर मंदिर कमेटी यह तय करती है कि गैर-हिंदू अंदर नहीं आ सकते, तो किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए. हर जगह के अपने नियम होते हैं. मुसलमानों को शायद गंगोत्री नहीं जाना चाहिए, और अगर वे जाते हैं, तो इससे टकराव हो सकता है. दूसरे धर्मों की पवित्र जगहों पर जाने से बचना बेहतर है. मक्का और मदीना में गैर-मुसलमानों को इजाजत नहीं है. लेकिन कोई इस पर आपत्ति नहीं करता. ऐसे मामलों में कोई राजनीति नहीं होनी चाहिए.

अरशद मदनी ने फैसले पर जताई नाराजगी

उत्तराखंड में गैर-हिंदुओं के धार्मिक स्थलों में घुसने पर रोक के बारे में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी ने कहा, “उन्हें लगता है कि देश उनका है, और वे जनता को किसी भी दिशा में ले जा सकते हैं, लेकिन समय बदल गया है. यह अच्छा है कि लोग प्यार और भाईचारे से रहें और जमीयत उलेमा-ए-हिंद यही सिखाती है. उन्होंने यह भी कहा, यह सिर्फ केदारनाथ में नहीं है. असम में पूरी कॉलोनियों को गिराया जा रहा है और लाखों मुसलमानों को बांग्लादेशी बताया जा रहा है.

श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के चेयरमैन ने क्या बताया?

गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर बैन के बारे में, श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने कहा- श्री केदारनाथ धाम और श्री बद्रीनाथ धाम टूरिस्ट डेस्टिनेशन नहीं हैं. ये सनातन परंपराओं के सबसे बड़े आध्यात्मिक केंद्र हैं. यहां प्रवेश का सवाल नागरिक अधिकारों का मामला नहीं है, बल्कि धार्मिक आस्था का मामला है. हमने कोई नया नियम लागू नहीं किया है. हमारे तीर्थ पुरोहित, हमारे स्टेकहोल्डर और संत समुदाय का मानना ​​है कि इन धार्मिक संस्थानों, इन धार्मिक आस्था के केंद्रों में गैर-हिंदुओं का प्रवेश प्रतिबंधित होना चाहिए. उन्हें यहां से पूरी तरह बैन कर देना चाहिए, और हमारी आने वाली बोर्ड मीटिंग में, हम एक प्रस्ताव लाएंगे कि जो कोई भी सनातन धर्म में आस्था और विश्वास नहीं रखता, जो मां गंगा में विश्वास नहीं रखता, जो बाबा केदार में विश्वास नहीं रखता, जो भगवान बद्रीनाथ में विश्वास नहीं रखता, उसे इस इलाके से पूरी तरह बैन कर दिया जाए.

सभी धार्मिक संस्थानों और मंदिरों में बैन पूरी तरह से लागू किया जाएगा : हेमंत द्विवेदी

चेयरमैन हेमंत द्विवेदी ने कहा – श्री बद्रीनाथ केदारनाथ धाम के तहत हमारे सभी 48 मंदिर, जिनमें श्री केदारनाथ और श्री बद्रीनाथ के दो मुख्य मंदिर और पंच केदार, पंच बद्री, उखीमठ, कालीमठ, त्रियुगीनारायण, भविष्य बद्री, नरसिंह मंदिर सहित 46 अन्य मंदिर शामिल हैं, हमारे सभी धार्मिक संस्थानों और मंदिरों में, यह बैन पूरी तरह से लागू किया जाएगा.

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लेखक के बारे में

By Arbindkumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा मुख्यधारा की पत्रकारिता में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक वरिष्ठ पत्रकार और लेखक हैं. वर्तमान में, वह प्रभात खबर डॉट कॉम (Prabhat Khabar) में सीनियर कंटेंट राइटर के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. अरबिंद नेशनल, इंटरनेशनल और स्पोर्ट्स कैटेगरी में अपनी लेखनी के लिए जाने जाते हैं. गहरी रिसर्च पर आधारित स्पेशल स्टोरीज, रिपोर्टिंग और जटिल मुद्दों पर आसान भाषा में 'एक्सप्लेनर' लिखना उनकी मुख्य यूएसपी (USP) है.

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अरबिंद ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत देश की प्रतिष्ठित बहुभाषी न्यूज एजेंसी 'हिंदुस्थान समाचार' से बतौर रिपोर्टर की थी. इसके बाद उन्होंने प्रसार भारती के अंग दूरदर्शन और आकाशवाणी के साथ भी काम किया, जहां उन्होंने एंकरिंग, वॉइस-ओवर और रिपोर्टिंग के गुर सीखे. साल 2011 में वह 'प्रभात खबर डॉट कॉम' से जुड़े और तब से लगातार डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

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खेल पत्रकारिता और जमीनी रिपोर्टिंग में अरबिंद का योगदान उल्लेखनीय रहा है. उनकी कुछ सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल हैं:

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