Coronavirus Lockdown : मोमबत्ती या दीया जलाने से पहले पढ़ें ये जरूरी बात

do not use alcoholic sanitizer before lighting candle or lamp : डॉक्‍टर्स की मानें तो सैनिटाइजर्स को ऐसी जगह के पास इस्‍तेमाल ना करें जहां आग लगने की संभावना हो जैसे- रसोई गैस, लाइटर, माचिस आदि.

कोरोना वायरस को पराजित करने की देश की ‘सामूहिक शक्ति’ को प्रदर्शित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे रविवार (पांच अप्रैल) को रात नौ बजे नौ मिनट तक अपने घरों की दहलीज, बालकनी में खड़े रह कर दीया, मोमबत्ती, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाएं. लेकिन आप थोडा संभलकर इस कार्य को करें. आइए हम आपको बताते हैं आखिर क्या सावधानी आपको इस दौरान बरतनी है.

सरकार ने शनिवार को लोगों को आगाह किया कि रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील पर मोमबत्ती या दीया जलाने से पहले अल्कोहल वाले हैंड सैनेटाइजर का इस्तेमाल नहीं करें क्योंकि वे ज्वलनशील होते हैं. सेना भी लोगों से इसी तरह की अपील की और कहा कि हाथ धोने के लिए साबुन का इस्तेमाल करें. आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को लोगों से अपील की थी कि पांच अप्रैल को सामूहिक एकजुटता का प्रदर्शन करने के लिए रात नौ बजे नौ मिनट के लिए घरों की लाइट बंद करें तथा दीये, मोमबत्ती या अपने मोबाइल फोन की टॉर्च जलाएं. मोदी ने 11 मिनट के वीडियो संदेश में लोगों से घरों के अंदर ही रहने और समूहों में एकत्रित नहीं होने की भी अपील की.

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पीआईबी के प्रधान महानिदेशक के एस धतवालिया ने एक मीडिया ब्रीफिंग में कहा कि रविवार को मोमबत्ती या दीया जलाने से पहले कृपया अल्कोहल आधारित हैंड सैनेटाइजरों का इस्तेमाल करने से बचें. दरअसल, कोरोना वायरस के खौफ के चलते लोग हैंड सैनिटाइजर का इस्‍तेमाल इनदिनों ज्यादा करने लगे हैं. वे बिना उससे जुड़ी सावधानियों को समझे धड़ल्‍ले से सैनिटाइजर यूज कर रहे हैं. सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के अनुसार, लोगों को अल्‍कोहल-बेस्‍ड हैंड सैनिटाइजर यूज करने चाहिए जिनमें कम से कम 60% अल्‍कोहल होना चाहिए. हैंड सैनिटाइजर्स में कम से कम 60 पर्सेंट अल्‍कोहल होता है, ऐसे में वे बेहद ज्‍वलनशील होते हैं यानी उनमें बड़ी तेजी से आग लगती है.

डॉक्‍टर्स की सलाह

डॉक्‍टर्स की मानें तो सैनिटाइजर्स को ऐसी जगह के पास इस्‍तेमाल ना करें जहां आग लगने की संभावना हो जैसे- रसोई गैस, लाइटर, माचिस आदि. सैनिटाइजर्स को पर्याप्‍त मात्रा में इस्‍तेमाल करें और फिर उसे सूख जाने दें. यानि 5 अप्रैल को दीया या कैंडल जलाते वक्त आप हाथों में हो सके तो सैनिटाइजर्स का उपयोग नहीं करें. नहीं तो आपके हाथों में आग पकडने का खतरा है.

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क्या करें : घरों की दहलीज पर दीया या मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाएं. कुछ पल अकेले में मां भारती का स्मरण करें.

क्या न करें : घर से बाहर नहीं जाएं. सोशल डिस्टेंसिंग की लक्ष्मण रेखा न तोड़ें. कोरोना की चेन तोड़ने का यही इलाज है.

क्या है मकसद : कोरोना को हराने के लिए प्रकाश के तेज को चारों ओर फैलाना. कोई अकेला नहीं है. इस भाव को विकसित करना.

यह मैसेज हो रहा है सोशल मीडिया पर वायरल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से अपील की कि वे रविवार (पांच अप्रैल) को रात नौ बजे नौ मिनट तक अपने घरों की दहलीज, बालकनी में खड़े रह कर दीया, मोमबत्ती, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैशलाइट जलाएं. पीएम मोदी के इस संदेश के बाद सोशल मीडिया पर एक मैसेज वायरल हो रहा है. आप भी देखें वो मैसेज….

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लेखक के बारे में

Author: Amitabh Kumar

Published by: Prabhat Khabar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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