पेपर लीक पर सख्ती बढ़ेगी, फास्ट-ट्रैक कोर्ट के मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी

पेपर लीक की घटनाओं पर नकेल कसने के लिए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एक नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है.

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रश्नपत्र लीक के मामलों पर सख्ती बढ़ाने के लिए नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है. इस प्रस्तावित कानून में पेपर लीक के दोषियों के लिए कठोर सजा, जेल और जुर्माने की व्यवस्था की गई है. पेपरलीक के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रावधान भी इस मसौदे में किया गया है. यह जानकारी पीटीआई न्यूज एजेंसी की ओर से दी गई है.

सरकार का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षाओं को निष्पक्ष रूप से आयोजित करना है, ताकि छात्रों का भविष्य बेहतर बन सके. विधेयक को संसद के मौजूदा मानसून सत्र में ही पेश किए जाने की बात सरकार ने कही है.


अगले सप्ताह संसद में आएगा विधेयक


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को घोषणा की थी कि अगले सप्ताह संसद में एक विधेयक पेश किया जाएगा, जिसमें प्रश्नपत्र लीक के खिलाफ सख्त प्रावधान होंगे. इस घोषणा के कुछ घंटे बाद ही मंत्रिमंडल ने मसौदे को मंजूरी दी. पीटीआई ने सूत्रों हवाले से यह बताया कि संसद भवन परिसर में प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में प्रश्नपत्र लीक के मामलों में शामिल लोगों को मौजूदा कानूनों की तुलना में अधिक कड़ी सजा देने का प्रावधान करने के लिए एक विधेयक के मसौदे को मंजूरी दी गई.

काॅकरोच जनता पार्टी के सदस्यों से सरकार ने की बात

सरकार की ओर से बार-बार यह कहा जा रहा है कि सरकार छात्रों की समस्याओं का निदान करने के लिए तत्पर है. सरकार छात्रों को प्राथमिकता सूची में रखती है, इसलिए सरकार काॅकरोच जनता पार्टी के सदस्यों से बातचीत के लिए तैयार भी हो गई. संविधान क्लब में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ काॅकरोच जनता पार्टी के सदस्य सौरभ दास और आशुतोष ने मुलाकात की. पार्टी ने अपनी तीन मांगों को सरकार के सामने रखा, जिसपर अपना जवाब सरकार उन्हें शनिवार को देगी.

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By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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