तेलंगाना में भाजपा को झटका : एक और नेता रापोलू आनंद भास्कर ने छोड़ी पार्टी, टीआरएस का थामा दामन

रापोलू आनंद भास्कर का पार्टी छोड़ने से पहले तेलंगाना विधान परिषद के पूर्व सभापति और भाजपा नेता स्वामी गौड़ और एक दूसरे नेता श्रवण दासोजू ने पार्टी छोड़ दी थी. इन दोनों नेताओं ने भी भाजपा छोड़ने के बाद टीआरएस का ही दामन थामा है.

हैदराबाद : भारत में सत्तारूढ़ सियासी पार्टी भाजपा को तेलंगाना में एक झटका लगा है. बुधवार को तेलंगाना भाजपा के एक और नेता रापोलू आनंद भास्कर ने पार्टी छोड़ दी है. खबर है कि रापोलू आनंद भास्कर ने भाजपा को छोड़कर तेलंगाना में सत्तासीन पार्टी टीआरएस (तेलंगाना राष्ट्र समिति) का दामन थाम लिया है. रापोलू आनंद भास्कर का पार्टी छोड़ने से पहले तेलंगाना विधान परिषद के पूर्व सभापति और भाजपा नेता स्वामी गौड़ और एक दूसरे नेता श्रवण दासोजू ने पार्टी छोड़ दी थी.

टीआरएस ने रापोलू आनंद भास्कर का किया स्वागत

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, तेलंगाना में टीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष और के चंद्रशेखर राव सरकार के मंत्री केटी रामाराव ने रापोलू आनंद भास्कर पार्टी में स्वागत किया है. रापोलू आनंद भास्कर का पार्टी छोड़ने से पहले तेलंगाना विधान परिषद के पूर्व सभापति और भाजपा नेता स्वामी गौड़ और एक दूसरे नेता श्रवण दासोजू ने पार्टी छोड़ दी थी. इन दोनों नेताओं ने भी भाजपा छोड़ने के बाद टीआरएस का ही दामन थामा है.

भास्कर ने जेपी नड्डा को लिखी चिट्ठी

भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा को लिखे पत्र में रापोलू आनंद भास्कर ने कहा कि क्या पार्टी सकारात्मक धर्मनिरपेक्षता के सिद्धांत का पालन कर रही है? उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि आपकी पार्टी से अलग होते हुए मेरे लिए आरोप लगाना उचित नहीं है, लेकिन मैं आपसे विनम्रता से अनुरोध करता हूं कि पूरी ईमानदारी से आत्मनिरीक्षण कराएं. भास्कर ने आरोप लगाया कि उनकी अनदेखी की गई, अपमान किया गया और राष्ट्रीय भूमिका में अलग-थलग कर दिया गया.

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पहले कांग्रेस में भी रह चुके हैं आनंद भास्कर

बता दें कि भाजपा छोड़कर टीआरएस का दामन थाने वाले रापोलू आनंद भास्कर 2012 से 2018 तक राज्यसभा के सदस्य रहे. उस समय वह कांग्रेस में थे. हाल में उन्होंने तेलंगाना के मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के आधिकारिक आवास-सह-शिविर कार्यालय प्रगति भवन में उनसे मुलाकात की थी और सत्तारूढ़ पार्टी में शामिल होने की इच्छा प्रकट की थी. हथकरघा उत्पादों पर जीएसटी लगाने के राजग सरकार के फैसले पर निराशा प्रकट करते हुए भास्कर ने राव से कहा कि वह यह सब बर्दाश्त नहीं कर सकते क्योंकि वह हथकरघा का काम करने वाले परिवार से जुड़े हैं. पूर्व राज्यसभा सदस्य ने कांग्रेस से इस्तीफा देकर 2019 में भाजपा की सदस्यता ले ली थी.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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