नयी दिल्ली : भले ही लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद संघ परिवार के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने स्वयंसेवकों को यह हिदायत दी हो कि हमारा काम नमो-नमो करनानहीं है और जन जागरण का हमारा काम अब पूरा हो चुका है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य के ताजा अंक में इस बार […]
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
नयी दिल्ली : भले ही लोकसभा चुनाव संपन्न होने के बाद संघ परिवार के प्रमुख मोहन भागवत ने अपने स्वयंसेवकों को यह हिदायत दी हो कि हमारा काम नमो-नमो करनानहीं है और जन जागरण का हमारा काम अब पूरा हो चुका है, लेकिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पांचजन्य के ताजा अंक में इस बार नमो-नमो की ही गूंज है.
पत्र के कवर पेज पर इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तसवीर है और शीर्षक दिया गया है – सुस्ती का नहीं काम. मोदी सरकार के 100 दिन पूरे होने पर पांचजन्य ने विशेष कवरेज दिया है. संघ की आवाज माने जाने वाले पांचजन्य ने मोदी सरकार को फौलादी इरादों वाली सरकार करार दिया है.
पत्र ने कहा है कि केंद्र में सरकार बदलना सिर्फ सत्ता का परिवर्तन नहीं है, बल्कि यह कार्य संस्कृति बदलाव लाने का माध्यम भी है. पत्र में एक घटना की जिक्र करते हुए कहा है कि कैसे मोदी रात में दो बजे अपने एक युवा मंत्री को फोन कर उनके विभाग से संबंधित मामले को देखने का निर्देश देते हैं. पांचजन्य में रक्षा क्षेत्र में विदेशी निवेश की सीमा 49 प्रतिशत किये जाने की तारीफ की गयी है और इसे सेना को मजबूत व आधुनिक बनाने का प्रयास बताया गया है. अमेरिका के साथ परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग के लिए किये गये गोपनीय करार की भी चर्चा की गयी है.
सैनिक की बहुचर्चित व लंबे समय की मांग मांग वन रैंक, वन पे को पूरा करने की भी तारीफ की गयी है. मोदी के उस बयान का भी उल्लेख किया है कि जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत किसी को आंख दिखा कर बात नहीं करेगा और न ही आंख झुका कर किसी से बात करेगा. जंगी जहाज व युद्धपोत सेना को सौंपे जाने की भी तारीफ की गयी है. पत्र ने मोदी के जापान यात्र और दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों को नया कलेवर देने की भी प्रशंसा की गयी है. मोदी सरकार के जन धन योजना की भी तारीफ की गयी है.
पत्र में मोदी सरकार के कामकाज व उपलब्धियों पर हजारीबाग से भाजपा सांसद जयंत सिन्हा ने एक लेख लिखा है. इसमें ढांचागत क्षेत्र में आने वाली बाधा को दूर करने, भूमि अधिग्रहण व वित्त पोषण में आने वाली बाधा को दूर करने, कृषि अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पहल किये जाने, गांव-गांव को इंटरनेट से जोड़ने, श्रम कानून में संशोधन, पीएसयू का निजीकरण व बैंकों को पुनर्पूजीकरण को महत्वपूर्ण फैसला करार दिया गया है. पत्र में मोदी सरकार की कूटनीति की भी तारीफ की गयी है.