बेंगलुरूः कर्नाटक में सियासी उठापठक अब चरम पर है. यहां एक बार फिर राजनीतिक संकट और गहरा गया है. 13 माह पहले कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन के तहत बनी एचडी कुमारस्वामी की अगुवाई वाली सरकार पर खतरा मंडरा रहा है. गठबंधन की सरकार को गहरा झटका तब लगा जब शनिवार को कांग्रेस के 10 विधायक और जेडीएस के तीन विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष को इस्तीफा सौंप दिया.
.सूत्रों के अनुसार,इस्तीफ़ा देने वाले इन 11 विधायकों में तीन ऐसे हैं जो कांग्रेस पार्टी के वफ़ादार या पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के करीबी हैं.कांग्रेस के जिन विधायकों ने इस्तीफा दिया है, उसमें से कई विधायकों का कहना है कि अगर सिद्धारमैया सीएम बनते हैं तो वे अपना इस्तीफा वापस ले सकते हैं. राज्य के सीएम कुमारस्वामी सियासी संकट के बीच अपना अमेरिका दौरा बीच में ही छोड़कर लौट रहे हैं.
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कांग्रेस नेता डीके शिवकुमार ने कहा है कि जेडीएस ने अपनी पार्टी के नेताओं की बैठक बुलाई है. हम भी अपने पार्टी के नेताओं को बुलाएंगे और इस मुद्दे को सुलझाएंगे. मुझे विश्वास है कि चीजें तुरंत ठीक हो जाएंगी. राष्ट्र और दोनों पक्षों के हित में हम सरकार को सुचारू रूप से चलाना चाहते हैं. मुझे भरोसा है कि विधायक वापस आएंगे.
पल पल बदल रहे हालात के बीचकांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा है कि हम 5-6 विधायकों के संपर्क में हैं और उनसे बातचीत की जा रही है. सिद्धरमैया ने विश्वास जताया कि सरकार को कोई खतरा नहीं है. साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे बीजेपी है. विधायकों के इस्तीफे को ऑपरेशन लोटस बताते हुए सिद्धरमैया ने कहा कि सबकुछ ठीक है, मैं विधायकों से बात कर रहा हूं.
कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे बेंगलुरु पहुंच चुके हैं. खड़गे ने खुद को मुख्यमंत्री बनाए जाने की अफवाहों को खारिज कर दिया. कहा कि इस बारे में उन्हें कोई सूचना नहीं है. कर्नाटक में गठबंधन की सरकार जारी रहेगी और बेहतर ढंग से चलती रहेगी. अफवाहों के जरिये गठबंधन में फूट डालने की कोशिश की जा रही है. जब नाराज विधायकों से चर्चा पर सवाल किया गया तो खड़गे ने कहा कि मैं यह नहीं बता सकता कि मैं विधायकों से क्या बात करने वाला हूं. हां ये जरूर है कि जब विधायकों से बात करूंगा तभी पता चलेगा कि उनकी राय क्या है. वे कितना माइलेज दे चुके हैं और हम क्या कर सकते हैं?
यदि विधायकों का इस्तीफा स्वीकार कर लिया जाता है तो सत्तारूढ़ गठबंधन (जिसके 118 विधायक हैं) 224 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत खो देगा. वहीं, भाजपा के 105 विधायक हैं. इस्तीफा मंजूर हुआ तो 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा की स्ट्रेंथ घटकर 210 हो जाएगी. ऐसे में बहुमत के लिए 113 के बजाय 106 सीटों की जरूरत पड़ेगी. बागी विधायकों के इस्तीफे के बाद सत्ताधारी जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन के विधायकों की संख्या 118 से घटकर 104 रह जाएगी, जो बहुमत के लिए जरूरी सीटों से 2 कम होगी.
