नयी दिल्ली : भारत कोरोनावायरस (Coronavirus) की दूसरी लहर से बेहाल है. इस बीच विदेशों से भारत को कई प्रकार की मदद मिल रही है. आज अमेरिका से 1 लाख 25 हजार रेमडेसिविर (Remdesivir) दवा भारत पहुंची है. यह दवा कोरोना संक्रमण के गंभीर मामलों में मरीजों को दिया जाता है. अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हर अमेरिकी भारत के साथ खड़ा है.
दूतावास की ओर से बताया गया कि अमेरिका की ओर से दवाओं की यह चौथी खेप है. अभी कई और मदद भारत पहुंचने वाले हैं. बता दें कि रूस, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, यूएई ताइवान, फ्रांस सहित कई देशों से भारत को मदद भेजी जा रही है. ताइवान ने आज ही 150 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और 500 ऑक्सीजन सिलेंडर भेजे हैं.
वहीं, फ्रांस की ओर से रविवार को पहले चरण में उपयोग के लिए तैयार 28 टन चिकित्सीय आपूर्तियां भारत भेजी गयी हैं. फ्रांस के दूतावास ने कहा कि सभी आठ संयंत्र कई वर्षों तक चौबीसों घंटे 250 बिस्तर वाले एक अस्पताल को लगातार ऑक्सीजन की आपूर्ति कर सकते हैं और कहा कि ये संयंत्र आस-पास की हवा से चिकित्सीय ऑक्सीजन उत्पन्न करते हैं.
Also Read: 30 अप्रैल से पहले वैक्सीन लगवाने वालों को फ्री में लगेगा दूसरा डोज, स्वास्थ्य मंत्रालय ने कही यह बात
फ्रांस ने कहा कि हम इस मुश्किल वक्त में भारत के साथ खड़े हैं, ठीक उसी तरह जैसे भारत हमेशा फ्रांस के साथ खड़ा रहा है. पिछले साल वसंत के मौसम में जब फ्रांस के अस्पताल कमियों से जूझ रहे थे तब भारत ने अहम चिकित्सीय दवाओं के निर्यात से जीवनरक्षक मदद भेजी थी. फ्रांस के लोग इस बात को भूले नहीं हैं.
इसके अलावा रविवार को बेल्जियम ने भी भारत को रेमडेसिविर की 9,000 शीशियां भेजी हैं. शनिवार रात अमेरिका ने भारत भेजे गये तीसरे विमान के जरिए 1,000 ऑक्सीजन सिलेंडर, रेगुलेटर और अन्य चिकित्सीय उपकरण भेजे थे. रूस से स्पूतनिक V टीके की पहली खुराक भी शनिवार को भारत पहुंच गयी है. इससे नौजवानों के टीकाकरण में बड़ी मदद होगी.
Posted By: Amlesh Nandan.
