सदर प्रखंड की लटकी योजनाओं का जिम्मेदार कौन

अक्सर ऐसा होता कई सरकारी योजनाओं का काम धरातल पर नहीं दिखता है. कई पंचायतों में योजनाओं का काम एक से दो प्रतिशत भी पूरा नहीं हुआ है. इसके बाद भी राशि की निकासी हो गयी

329 योजनाओं में से केवल 24 योजनाएं ही पूरी हो पाई हैं. चापाकल मरम्मत की बात करें तो कई वार्डों में 15वें वित्त आयोग की योजनाओं के तहत 5104 में से मात्र 32 कार्य ही पूरे हुए हैं.

लखीसराय के प्रतिनिधि के अनुसार

सदर प्रखंड में कई पंचायतों में योजनाओं का काम एक से दो प्रतिशत भी पूरा नहीं हुआ है. कुछ योजनाओं में आधी-अधूरी राशि की निकासी कर ली गई है. जब इसका विरोध किया जाता है तो पंचायत के जनप्रतिनिधि उस व्यक्ति के दुश्मन बन जाते हैं जो भ्रष्टाचार का विरोध करता है. गढ़ी बिशनपुर में गली-नाली, आरसीसी नाला जैसी योजनाओं में धांधली हो रही है. राशि का बंदरबांट किया जा रहा है. फंड मिलने के बाद भी धरातल पर काम धीमी गति से चल रहा है.

पूरे प्रखंड की बात करें तो 329 योजनाओं में से केवल 24 योजनाएं ही पूरी हो पाई हैं. चापाकल मरम्मत की बात करें तो कई वार्डों में 15वें वित्त आयोग की योजनाओं के तहत 5104 में से मात्र 32 कार्य ही पूरे हुए हैं. वहीं सदर प्रखंड के गढ़ी बिशनपुर पंचायत की बात करें तो मुखिया को किसी भी योजना की जानकारी नहीं है. स्थानीय लोगों की मानें तो योजनाओं का संचालन उनके पति मनोज कुमार द्वारा किया जाता है. जांच अधिकारियों द्वारा जब मुखिया से योजनाओं के बारे में पूछा गया तो वे कुछ भी नहीं बता पायी. गढ़ी बिशनपुर की सभी योजनाएं ग्राम पोर्टल पर अपलोड हैं. ऑनलाइन निगरानी के बावजूद जमीन पर काम नहीं हो रहा है.

मुखिया की लापरवाही: पिछले छह माह से नहीं हुई आम सभा

मुखिया की लापरवाही के कारण पिछले छह माह से कोई आम सभा नहीं हुई है. आम सभा में न कोई योजना ली जा रही है और न ही कोई कार्य धरातल पर दिख रहा है.

पहले गढ़ी बिशनपुर में मुखिया पति द्वारा विद्यालय या अन्य सरकारी भवन में आम सभा कराई जाती थी, लेकिन छह माह से कोई आम सभा नहीं करायी गयी है. नगर परिषद अधिनियम के अनुसार तीन से चार बार बैठक नहीं करने और उसमें भाग नहीं लेने वाले सभापति, उपसभापति एवं वार्ड पार्षद पर कार्रवाई होती है. हाल ही में वार्ड नंबर 25 की आरती देवी को बैठक में भाग नहीं लेने के कारण पदच्युत कर दिया गया है. आम सभा नहीं करने वाले मुखिया को भी पदच्युत करने का नियम है या नहीं, इस पर किसी अधिकारी ने स्थिति स्पष्ट नहीं की है.

100 फीट की राशि निकासी, धरातल पर 50 फीट का काम

योजनाएं तो स्वीकृत होती हैं, लेकिन प्राक्कलन के अनुसार काम पूरा किये बिना ही राशि निकाल ली जाती है. उदाहरण के लिए, यदि 100 फीट पीसीसी सड़क या नाली का निर्माण होना है तो काम केवल 50 फीट ही कराया जाता है, लेकिन राशि 100 फीट की निकाल ली जाती है.

बोले मुखिया प्रतिनिधि

इस संबंध में मुखिया प्रतिनिधि मनोज कुमार ने बताया कि उनके द्वारा पूरा कार्य किया जाता है. पंचायत फंड में राशि होने के बाद ही कार्य पूरा किया जाता है. उन्होंने कहा कि जल्द ही आम सभा बुलायी जायेगी.

बोले अधिकारी

पंचायती राज पदाधिकारी पम्मी रानी ने बताया कि पोर्टल पर योजनाओं के पूर्ण होने या अधूरी रहने को लेकर कुछ मिस अंडरस्टैंडिंग भी होती है. उन्होंने कहा कि योजनाओं को पूरा किया जा सकता है. प्राक्कलन के मुताबिक कार्य नहीं होने पर शिकायत मिलने के बाद जांच एवं कार्रवाई की जाती है.

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