औरंगाबाद ग्रामीण. जेल में बंद बंदी की मौत व रमेश चौक पर लाठीचार्ज मामले में ग्रामीणों ने शुक्रवार की शाम शहर में कैंडल मार्च निकाला. यह कैंडल मार्च शहर के गांधी मैदान से होते हुए रमेश चौक पर पहुंचा, जहां मौजूद सभी लोगों ने मृतक को श्रद्धांजलि दी. मुखिया सुजीत सिंह ने बताया कि 30 अगस्त को बंदी की जेल में मौत हो गयी थी. जब परिजन रमेश चौक पर शव रखकर प्रदर्शन कर रहे थे, तो पुलिस प्रसाशन द्वारा लाठी चार्ज की गयी और चार लोगों पर गलत प्राथमिकी दर्ज की गयी. उन्होंने कहा कि उसी दिन उनके पोते की भी दुर्घटना हुई थी. उन्होंने इस मामले में एनएचएआइ के कर्मियों पर लापरवाही का आरोप लगाया. आये दिन प्रतिदिन ऐसी घटनाएं हो रही है, जिसमे आमलोगों को परेशान किया जा रहा है. जिस तरीके से न्याय मांगने वाले लोगों पर लाठीचार्ज की गयी, वह निंदनीय है. मृतक धर्मेंद्र राम गरीब परिवार से था. उत्पाद विभाग की टीम शराब के साथ उसे गिरफ्तार किया था. इसके बाद उसकी बेरहमी से पिटाई की गयी. पिटाई के बाद उसकी मौत हो गयी. जब उसकी मौत हुई तो जेल प्रसाशन द्वारा उसके शव को जिंदा बताते हुए इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया, जहां के डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया था. मानवता इतनी शर्मसार हो गयी कि मौत के बाद भी मृतक के हाथों में हथकड़ी लगा हुआ था. पुलिस मामले को छुपाना चाहती थी. जब परिजन रमेश चौक पर शव रखकर प्रदर्शन करने लगे तो पुलिस द्वारा अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए लाठी चार्ज की गयी. इसके बाद चार लोगों पर झूठा एफआईआर दर्ज की गयी है. कहा कि मृतक के परिजनों को 50 लाख रुपये मुआवजा व पत्नी को सरकारी नौकरी दिया जाय और जो झूठा केस किया गया है उसे खत्म किया जाये.
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