मेदिनीनगर. पलामू की स्वतंत्रता संग्राम व संविधान निर्माण की ऐतिहासिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में पहल करते हुए हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड के सदस्य सह अधिवक्ता हृदयानंद मिश्र ने राज्यपाल-सह-कुलाधिपति से नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय (एनपीयू), मेदिनीनगर में संविधान सभा के सदस्य रहे यदुवंश सहाय उर्फ यदु बाबू एवं अमिय कुमार घोष उर्फ गोपा बाबू की प्रतिमाएं स्थापित करने की मांग की है. हृदयानंद मिश्र के नेतृत्व में वरिष्ठ इंटक नेता राजकुमार सिंह ने राज्यपाल को लिखित पत्र राजभवन में राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव नितिन मदन कुलकर्णी के माध्यम से सौपा. पत्र में कहा गया है कि यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष पलामू की उस ऐतिहासिक पीढ़ी के प्रतिनिधि थे,
जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाने के साथ-साथ देश के संविधान निर्माण में भी योगदान दिया. दोनों तत्कालीन डालटनगंज क्षेत्र से जुड़े रहे और संविधान सभा के सदस्य रहे. श्री मिश्र ने कहा कि एनपीयू पलामू का प्रमुख उच्च शिक्षण एवं शोध संस्थान है. ऐसे संस्थान के परिसर में उन महापुरुषों की प्रतिमाएं स्थापित होना, जिन्होंने देश के स्वतंत्रता आंदोलन और संविधान निर्माण में योगदान दिया, विद्यार्थियों को अपने क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा. उन्होंने कहा कि यदुवंश सहाय उर्फ यदु बाबू का सार्वजनिक जीवन स्वतंत्रता आंदोलन, जनप्रतिनिधित्व और संविधान सभा की गतिविधियों से जुड़ा रहा। उनके जीवन से संबंधित विधानसभा की कार्यवाहियों, समाचार-पत्रों की कतरनों, पत्रों, तस्वीरों और अन्य ऐतिहासिक दस्तावेजों का संरक्षण आज समय की आवश्यकता है. इसी प्रकार अमिय कुमार घोष उर्फ गोपा बाबू भी संविधान सभा के सदस्य रहे और बाद में डालटनगंज से विधायक के रूप में सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे. उनके योगदान को भी पलामू के इतिहास और विश्वविद्यालय के अकादमिक विमर्श में उचित स्थान मिलना चाहिए. मिश्र ने कहा कि आज की पीढ़ी को यह जानना जरूरी है कि पलामू की धरती का संबंध केवल स्वतंत्रता आंदोलन के संघर्ष से ही नहीं, बल्कि भारतीय संविधान के निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया से भी रहा है.
विश्वविद्यालय परिसर में दोनों संविधान सभा सदस्यों की प्रतिमाएं इस ऐतिहासिक तथ्य को स्थायी रूप से जनस्मृति का हिस्सा बना सकती हैं. उन्होंने राज्यपाल से आग्रह किया कि प्रतिमा स्थापना के साथ एनपीयू में संविधान स्मृति दीर्घा स्थापित करने पर भी विचार किया जाए, जहां यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष के जीवन, स्वतंत्रता आंदोलन में उनकी भूमिका, संविधान सभा की कार्यवाही तथा उपलब्ध मूल दस्तावेजों और तस्वीरों को प्रदर्शित किया जा सके.
हृदयानंद मिश्र ने कहा कि यह पहल किसी व्यक्ति विशेष के सम्मान तक सीमित नहीं होगी, बल्कि पलामू की संवैधानिक और स्वतंत्रता संग्राम की विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का स्थायी प्रयास होगी. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्यपाल इस मांग पर सकारात्मक पहल करते हुए एनपीयू प्रशासन को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान करेंगे.
