पांच साल बाद भी केवि पलामू को नहीं मिला अपना भवन, निर्माण कार्य अधूरा

अस्थायी भवन में बिजली, पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं का भी अभाव

अस्थायी भवन में बिजली, पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं का भी अभाव प्रतिनिधि, मेदिनीनगर जिले के पोखराहा स्थित मेडिकल कॉलेज के समीप केंद्रीय विद्यालय पलामू के लिए 10 एकड़ भूमि पर भवन निर्माण कार्य वर्ष 2023 में शुरू किया गया था. योजना के अनुसार यह भवन जुलाई 2025 तक पूर्ण हो जाना चाहिए था, लेकिन अगस्त 2025 समाप्त होने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है. अभी तक प्लास्टर व वालपुट्टी तक का कार्य शुरू नहीं हो पाया है, जिससे विद्यालय के स्थायी संचालन में लगातार बाधा आ रही है. अस्थायी भवन में चल रहा है संचालन, मूलभूत सुविधाओं का अभाव 27 जुलाई 2020 को स्थापित इस विद्यालय का संचालन अब तक चैनपुर स्थित सदगुरु राजकीय प्लस टू उच्च विद्यालय के भवन में वैकल्पिक व्यवस्था के तहत किया जा रहा है. लेकिन यहां बिजली, पानी, शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है, जिससे शिक्षक, शिक्षिकाओं और विशेष रूप से महिला कर्मियों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. क्या कहते हैं विद्यालय के प्राचार्य विद्यालय के प्राचार्य माणिक कुमार ने बताया कि वर्तमान में 403 छात्र-छात्राएं नामांकित हैं. भवन में कक्षाओं की कमी इतनी है कि एक ही कमरे में लाइब्रेरी और कार्यालय संचालित हो रहा है. उन्होंने बताया कि लगभग 70 प्रतिशत कार्य भवन का पूर्ण हो चुका है. फिलहाल टाइल्स व मार्बल का कार्य चल रहा है. इसके अलावा, भवन के लिए ट्रांसफार्मर लगाने के लिए 20 लाख की स्वीकृति भी मिल चुकी है. प्राचार्य व शिक्षकों के लिए क्वार्टर निर्माण का कार्य भी प्रस्तावित है. जब तक विद्यालय को अपना भवन नहीं मिलेगा, तब तक इन परेशानियों से राहत मिलना मुश्किल है. स्थायी भवन से ही बिजली, पानी, और शौचालय जैसी सुविधाओं का समाधान संभव होगा. सांसद वीडी राम के प्रयास से हुई थी विद्यालय की स्थापना गौरतलब है कि पलामू में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना सांसद वीडी राम के प्रयासों से वर्ष 2020 में हुई थी. इसके लिए पोखराहा में 10 एकड़ भूमि चिह्नित की गयी थी. भवन निर्माण की अंतिम समय सीमा 31 जुलाई 2025 निर्धारित की गयी थी, लेकिन 31 अगस्त 2025 बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है. भविष्य अधर में, छात्र व अभिभावक चिंतित लगातार ढुलमुल निर्माण कार्य, प्रशासनिक लापरवाही, और संसाधनों की कमी के कारण छात्रों के शैक्षणिक जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है. अभिभावकों में भी इसको लेकर चिंता गहराती जा रही है.

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Author: DEEPAK

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