Bokaro News: 35 किमी लंबी गरगा नदी 35 साल में नहीं हो सकी प्रदूषण मुक्त

सीपी सिंह, बोकारो, कहते हैं कि नदियां जहां से गुजरती है, वहां संस्कृति का विकास हो जाता है. लेकिन, विकसित संस्कृति अति की राह पर चल पड़े. तो नदियां विलुप्त

सीपी सिंह, बोकारो, कहते हैं कि नदियां जहां से गुजरती है, वहां संस्कृति का विकास हो जाता है. लेकिन, विकसित संस्कृति अति की राह पर चल पड़े. तो नदियां विलुप्त होने लगती है. बोकारो जिला में बहने वाली गरगा नदी भी इस उदाहरण को सही साबित करने के करीब है. 35 किमी लंबी यह नदी मैली हो चुकी है. इतनी मैली कि नदी के पानी से स्नान करना, तो दूर की बात, आचमन करना भी संभव नहीं है. बोकारो जिले बने 35 साल हो गये. इन 35 साल में गरगा को साफ करने की मांग हजारों-लाखों बार हुई, लेकिन असर कुछ नहीं हुआ.

लगभग 35 किलोमीटर लंबी गरगा नदी ना सिर्फ प्रदूषण की मार झेल रही है, बल्कि अतिक्रमण से भी मर रही है. कई जगह गरगा नदी की चौड़ाई 25-30 फीट ही रह गयी है. बताते चलें कि कलौंदीबांध से गरगा नदी की धारा निकल कर कसमार, जरीडीह और चास प्रखंड के दर्जनों गांवों से गुजरते हुए दामोदर में मिलती है. गरगा नदी कसमार के गर्री और तेलमुंगा गांव होते हुए जरीडीह के वनचास होते हुए बाराडीह पहुंचने के दौरान गरगा में कई छोटी-छोटी जोरिया समाहित होती है. गांगजोरी से चिलगड्डा स्थित आशा विहार अस्पताल के बगल में चास प्रखंड के राधागांव होते हुए बालीडीह पहुंचती है. गरगा डैम के पानी का उपयोग बीएसएल करता है. यहां से बारी को-ऑपरेटिव, चास शहर, भर्रा होते हुए पुपुनकी के पास गरगा नदी का दामोदर में संगम होता है.

गरगा की सफाई के लिए दशकों से दौड़ रहा है कागजी घोड़ा

गरगा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने की बात दशकों से हो रही है. फाइल में टेंडर-टेंडर भी खेला गया. 2017-18 में नागपुर के फाइन एंड फाइन कंपनी की टीम ने गरगा नदी का निरीक्षण किया. इसके बाद अगस्त 2020 में एनजीटी के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने गरगा की सेहत सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाया, लेकिन अभी तक गरगा की स्थिति जस-की-तस बनी हुई है. इस दिशा में कागजी घोड़ा दौड़ने के अलावा कुछ खास नहीं हुआ.

जल्द गरगा बनेगी प्रदूषण मुक्त व सौंदर्ययुक्त : अपर नगर आयुक्त

चास नगर निगम के अपर नगर आयुक्त संजीव कुमार के अनुसार गरगा नदी की साफ-सफाई व नदी के आसपास के क्षेत्र के सौंदर्यीकरण के लिए दिल्ली बेस्ड एक कंपनी को हायर किया गया है. इस संबंध में उच्च स्तर पर बैठक भी हुई है. योजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनेगा. साथ ही लोगों को भी प्रकृति के प्रति जागरूक किया जायेगा. नमामि गंगे योजना के तहत गरगा को भी साफ किया जायेगा. इसके लिए 40 करोड़ का प्रोजेक्ट तैयार किया गया है.

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