प्रशासनिक समितियों में अधिवक्ताओं की भागीदारी क्यों नहीं? संजय विद्रोही ने उठाया सवाल

रांची जिला बार एसोसिएशन के सदस्य संजय विद्रोही ने सरकारी और प्रशासनिक समितियों में अधिवक्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है.

रांची से प्रवीण मुंडा की रिपोर्ट

रांची. रांची जिला बार एसोसिएशन के सदस्य संजय विद्रोही ने एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया है. उन्होंने कहा कि जिलों में समाहरणालय, नगर निगम, विकास भवन, पुलिस-प्रशासन और विधि-व्यवस्था से संबंधित कई समितियां बनती हैं. शांति समिति की बैठक होती है, कानून-व्यवस्था पर बैठक होती है, प्रशासनिक और सामाजिक विषयों पर बैठक होती है. पर इन समितियों में अधिवक्ताओं की भागीदारी नहीं होती है.

उन्होंने सवाल उठाया कि इन समितियों और बैठकों में अधिवक्ता समाज की संस्थागत भागीदारी सुनिश्चित क्यों नहीं की जाती?

अधिवक्ता सिर्फ न्यायालय में मुकदमा लड़ने वाला व्यक्ति नहीं

संजय विद्रोही ने कहा कि अधिवक्ता केवल न्यायालय में मुकदमा लड़ने वाला व्यक्ति नहीं है. वह प्रतिदिन कानून, प्रशासन, पुलिस, नागरिक अधिकार और आम जनता की समस्याओं से सीधे जुड़ा रहता है. समाज में कहां विवाद पैदा हो रहा है, प्रशासनिक व्यवस्था में कहां कमी है और कानून के क्रियान्वयन में आम नागरिक को कहां परेशानी हो रही है, इन बातों का व्यावहारिक अनुभव अधिवक्ताओं के पास होता है.

उदाहरण के तौर पर, अक्सर जमीन संबंधी विवादों में कई तकनीकी और कानूनी पेच फंस जाते हैं, जहां अधिवक्ताओं का अनुभव सीधे तौर पर प्रशासनिक कमियों को उजागर करने और आम जनता को राहत दिलाने में मदद कर सकता है. फिर इस अनुभव का उपयोग प्रशासनिक और सामाजिक समितियों में क्यों नहीं होना चाहिए?

समितियों में प्रतिनिधित्व के लिए रोटेशन की मांग

उन्होंने कहा कि कई समितियों में एक बार जिन व्यक्तियों का नाम शामिल हो गया, वही नाम वर्षों तक चलते रहते हैं. क्या प्रतिनिधित्व स्थायी सदस्यता बन जाना चाहिए? प्रतिनिधित्व में समय-समय पर बदलाव और रोटेशन होना चाहिए, ताकि समाज के अलग-अलग वर्गों, संस्थाओं और योग्य व्यक्तियों को अपनी बात रखने का अवसर मिले.

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राजधानी में अधिवक्ताओं से संवाद कम होने पर उठाया सवाल

अधिवक्ताओं के अनुभव का उपयोग क्यों नहीं होता, इस पर सवाल उठाने के बाद, श्री विद्रोही ने राजधानी रांची में संवाद की कमी पर भी प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि रांची झारखंड की राजधानी है. यहां राज्य सरकार, जिला प्रशासन, नगर निगम और अन्य महत्वपूर्ण संस्थाओं के कार्यक्रम होते हैं. राजभवन/लोक भवन में होने वाले कार्यक्रमों में भी पहले रांची जिला बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं तक निमंत्रण और संवाद की परंपरा दिखाई देती थी.

यदि अब वह संवाद कम हो रहा है, तो इस दूरी के कारणों पर भी विचार होना चाहिए.

महत्वपूर्ण समितियों में संस्थागत प्रतिनिधित्व की मांग

उन्होंने मांग की है कि समाहरणालय, शांति समिति, विधि-व्यवस्था, नगर निगम, विकास भवन तथा जनहित से संबंधित जिला एवं राज्यस्तरीय महत्वपूर्ण समितियों में अधिवक्ता समाज का उचित संस्थागत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाए.

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लेखक के बारे में

By Praveen Kumar Munda

प्रवीण कुमार मुंडा प्रभात खबर में डिप्टी चीफ रिपोर्टर के तौर पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता में उनका करीब 23 सालों का अनुभव है. वे 2003 में प्रभात खबर से जुड़े थे. वे झारखंड के आदिवासी समुदाय के भाषा, साहित्य, कला, संस्कृति सहित जीवन के अन्य पहलुओं की खबरों पर काम करते हैं. इसके अलावा झारखंड के मिशनरी संस्थाओं की रिपोर्टिंग का भी सालों का अनुभव है. कई मंचों पर वह प्रभात खबर का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं.साल 2021 में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (मुख्यमंत्री कार्यालय) में एक साल तक काम कर चुके हैं.

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