Deoghar news : बाबा नगरी में गणेश उत्सव की धूम, हर गली-मुहल्ले में गूंजे गणपति बप्पा मोरया के जयघोष

संवाददाता, देवघर. धार्मिक नगरी देवघर में बुधवार को गणेश उत्सव को लेकर भव्य पंडाल बनाये गये. वहीं पूजा पंडालों में लोगों की भीड़ देखने को मिली. बाबा नगरी में भी

संवाददाता, देवघर. धार्मिक नगरी देवघर में बुधवार को गणेश उत्सव को लेकर भव्य पंडाल बनाये गये. वहीं पूजा पंडालों में लोगों की भीड़ देखने को मिली. बाबा नगरी में भी गणेश पूजा की परंपरा काफी पुरानी है यही कारण है कि हर साल चतुर्थी के अवसर पर पूरा शहर गणपति बप्पा के जयकारों से गुंजायमान हो उठता है. सुबह होते ही शिवनगरी की गलियों और मोहल्लों से शंख, घंटी और ढोल-नगाड़ों की आवाजें गूंजने लगीं. भक्तगण शिवगंगा और आसपास के सरोवरों से कलश भरकर पूजा मंडपों में पहुंचे और विधिवत पूजा को प्रारंभ कराया गया. दिन के 10 बजे से ही शहरभर के मंडपों और घरों में गणेश प्रतिमा की प्राण-प्रतिष्ठा की गयी. चूंकि चतुर्थी तिथि दोपहर 1.30 बजे तक ही थी, इसलिए पूजा समितियों ने निर्धारित समय में ही विशेष अनुष्ठान संपन्न किया.पूरे शहर में उत्सव का नजारा देखते ही बनता था. पूजा पंडालों से लेकर गली-मोहल्लों तक को आकर्षक ढंग से सजाया गया था. कई समितियों ने मुंबई से विशेष रूप से गणेश प्रतिमाएं मंगाकर बप्पा को स्थापित कर पूजा-अर्चना की. इनमें सब्जी मंडी के सामने फाइव स्टार क्लब और सनबेल बाजार स्थित सेवन स्टार क्लब की प्रतिमाएं खास आकर्षण का केंद्र बनीं रहीं. देवघर की पहचान ही उसकी पूजा परंपरा से है. यहां काली पूजा से लेकर दुर्गा पूजा और अन्य धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन होता रहता हैं. गणेश उत्सव भी इसी परंपरा का हिस्सा है. शहर की कई प्रतिष्ठित समितियां जैसे गुलाब समाज, निराला समाज, दशरथ समाज और शिवगंगा स्थित गणेश कला मंदिर सौ साल से भी अधिक समय से बप्पा की आराधना कर रही हैं .इसके अलावा पांडव समाज, भोगाभोग समाज, ब्रदर्स समाज, बॉयज क्लब और अन्य कई संगठनों की ओर से भी प्रतिमाओं की स्थापना की गयी है. बाबा नगरी मेंकरीब एक हजार घरों में गणेश प्रतिमा विराजित की गयी है. मोहल्लों में बीस से तीस छोटे-बड़े मंडप सजे हुए हैं. यहां अधिकांश पूजा तीन से पांच दिनों तक चलेगी. वहीं कुछ स्थानों पर प्रतिमा का विसर्जन शारदीय नवरात्र से एक दिन पूर्व किया जायेगा. गणपति बप्पा के जयकारों से गूंजता शहर यह संदेश देता है कि धार्मिकता और सांस्कृतिक उत्सव यहां की जीवन-धारा का हिस्सा हैं. बाबा नगरी की पहचान केवल शिव की नगरी के रूप में ही नहीं,. यहां काली पूजा, दुर्गा पूजा व अन्य आयोजन भी उसी उत्साह के साथ होते है. इस कड़ी में गणेश उत्सव के आयोजन भी भव्य तरीके से किया गया.

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Published by: Sanjeev mishra

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