Devi Krishnapriya Ji: विवादों के दौर में भी क्यों बढ़ता जा रहा है इस कथावाचिका पर लोगों का विश्वास? शास्त्र, सेवा और सादगी से बनाया अलग मुकाम

Devi Krishnapriya Ji: देवी कृष्णप्रिया जी आज के समय में उन कथावाचकों में गिनी जाती हैं, जो अध्यात्म को दिखावे नहीं, बल्कि शास्त्र, अनुशासन और सेवा से जोड़ती हैं. बचपन से मिली धार्मिक शिक्षा और समाजसेवा के प्रति समर्पण ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है.

Devi Krishnapriya Ji: आज जब कई कथावाचक विवाद, ट्रोलिंग और आरोपों में घिरे रहते हैं, एक नाम ऐसा है जो लगातार आगे बढ़ रहा है. देवी कृष्णप्रिया जी सवाल उठता है… आखिर क्यों? मथुरा की भूमि में एक ब्राह्मण परिवार में जन्मी देवी कृष्णप्रिया जी को बचपन से ही संस्कार, भक्ति और शास्त्रों की शिक्षा मिली. महज 10 वर्ष की आयु से कथा-वाचन की शुरुआत इसी साधना का प्रमाण है.

प्रसिद्ध कथावाचकों की भीड़ में देवी कृष्णप्रिया जी इसलिए अलग हैं क्योंकि उनका अध्यात्म दिखावे या डर पर नहीं, शास्त्र और अनुशासन पर टिका है. यही वजह है कि उन पर उंगलियां कम, विश्वास ज्यादा उठता है.

वे उन चेहरों में से नहीं हैं जो धर्म के नाम पर नाम, धन या प्रचार बटोरते हैं. अब तक भी और आज भी अध्यात्म के नाम पर जनता को लूटने वालों से उन्हें अलग रखा जाता है.

उनकी हर कथा में भावनाओं के साथ श्रीमद्भागवत, रामकथा और शिवमहापुराण के स्पष्ट शास्त्रीय प्रमाण होते हैं. शायद यही कारण है कि उनकी बातों को तर्क से चुनौती देना आसान नहीं.

जब कई लोग कथा को कमाई का साधन बनाते हैं, देवी कृष्णप्रिया जी उसी धन को गौसेवा और समाजसेवा में लौटा देती हैं. यही कर्म उन्हें ट्रोलिंग से नहीं, सम्मान से जोड़ता है.

डिजिटल युग में जहां आध्यात्म भी कंटेंट बन चुका है, देवी कृष्णप्रिया जी कंटेंट नहीं, चरित्र और चेतना गढ़ रही हैं. और शायद इसी कारण वे चर्चा में हैं, विवाद में नहीं.

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लेखक के बारे में

By Saurabh Poddar

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