Parenting Tips: आजकल बच्चे पहले से ज्यादा सोशल हो गए हैं. 9 से 12 साल की उम्र में वे दोस्तों के घर खेलने जाते हैं, ग्रुप स्टडी करते हैं और कई बार स्लीपओवर भी प्लान करते हैं. ऐसे में पैरेंट्स के मन में बच्चों की सेफ्टी को लेकर चिंता होना बिल्कुल नॉर्मल है. बच्चों को हर समय रोकना-टोकना सही नहीं है, लेकिन उन्हें कुछ जरूरी सेफ्टी रूल्स सिखाना बहुत जरूरी है. ये छोटी-छोटी बातें बच्चे को स्मार्ट और सेफ दोनों बना सकती हैं.
कुछ गलत लगे तो तुरंत बताओ
अपने बच्चे को समझाएं कि अगर कोई बात, मजाक, हरकत या व्यवहार उसे अजीब या अनकम्फर्टेबल लगे, तो उसे तुरंत आपको बताना चाहिए. किसी भी बात को मन में दबाकर रखने की जरूरत नहीं है.
‘मम्मी-पापा को मत बताना’ सुनते ही अलर्ट हो जाओ
अगर कोई व्यक्ति बच्चे से कहे कि इस बात के बारे में घर पर मत बताना, तो यह रेड फ्लैग हो सकता है. बच्चों को बताएं कि ऐसी हर बात तुरंत माता-पिता के साथ शेयर करनी चाहिए.
अपने शरीर की रिस्पेक्ट करना सीखें
बच्चों को गुड टच और बैड टच के बारे में जरूर बताएं. उन्हें समझाएं कि उनके शरीर पर उनका पूरा हक है. अगर कोई गलत तरीके से छूने की कोशिश करे, तो वे तुरंत ‘नहीं’ कहें और वहां से दूर चले जाएं.
हर बात खुलकर शेयर करना जरूरी है
कभी-कभी कोई वीडियो, बातचीत या मजाक बच्चों को परेशान कर सकता है. उन्हें भरोसा दिलाएं कि वे बिना डांट के डर के अपनी हर बात आपसे शेयर कर सकते हैं. खुलकर बात करना ही सबसे बड़ी सेफ्टी है.
कहीं और जाना हो तो पहले बताना जरूरी है
अगर दोस्त के घर से बच्चे को पार्क, मॉल या किसी दूसरी जगह ले जाने की बात हो, तो उसे पहले माता-पिता को बताना चाहिए. बिना जानकारी दिए किसी दूसरी जगह जाना सही नहीं है.
बच्चों को आजादी देना जरूरी है, लेकिन साथ में उन्हें सेफ्टी की बेसिक बातें सिखाना भी उतना ही जरूरी है. जब बच्चे इन रूल्स को समझते हैं, तो वे ज्यादा कॉन्फिडेंट, अवेयर और सुरक्षित रहते हैं.
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