बेतिया से रवि ‘रंक’ की रिपोर्ट
Bettiah News: पश्चिम चंपारण जिले में बिना मान्यता और रजिस्ट्रेशन के बड़ी संख्या में निजी स्कूल संचालित होने का मामला सामने आया है. शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 498 निजी स्कूलों को ही मान्यता या प्रस्वीकृति प्राप्त है, जबकि कुल 639 निजी स्कूल संचालित पाए गए हैं. ऐसे में 130 से अधिक स्कूल बिना प्रस्वीकृति के संचालित होने की आशंका जताई जा रही है. शिक्षा विभाग ने ऐसे स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी तेज कर दी है.
बीईओ को कार्रवाई की अनुशंसा करने का निर्देश
जिला शिक्षा पदाधिकारी रविन्द्र कुमार और समग्र शिक्षा अभियान की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी गार्गी कुमारी ने सभी प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों को निर्देश दिया है कि अपने-अपने क्षेत्र में बिना प्रस्वीकृति संचालित निजी स्कूलों की पहचान कर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करते हुए रिपोर्ट उपलब्ध कराएं.
वर्ष 2023-24 में कराए गए सर्वेक्षण के अनुसार जिले में कुल 639 निजी स्कूल संचालित पाए गए थे, जबकि उनमें से केवल 498 स्कूलों के पास मान्यता या प्रस्वीकृति थी.
89 स्कूलों ने किया ऑनलाइन आवेदन
समग्र शिक्षा अभियान की जिला कार्यक्रम पदाधिकारी गार्गी कुमारी ने बताया कि निजी स्कूलों के नवीनीकरण और नए रजिस्ट्रेशन के लिए 10 जून तक आवेदन मांगे गए थे. उन्होंने बताया कि 89 निजी स्कूलों द्वारा इ-संबंधन पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन अपलोड किया गया है. इन आवेदनों की जांच के लिए जल्द बैठक आयोजित की जाएगी तथा संबंधित स्कूलों का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा.
बिना प्रस्वीकृति स्कूल चलाने पर भारी जुर्माना
जिला शिक्षा पदाधिकारी रविन्द्र कुमार ने बताया कि बच्चों के मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 (आरटीई एक्ट) की धारा 18 के तहत बिना सक्षम प्राधिकार की अनुमति के कोई भी स्कूल संचालित नहीं किया जा सकता.
उन्होंने कहा कि इस प्रावधान का उल्लंघन करने पर संबंधित संस्था या संचालक पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. इसके अलावा निर्धारित अवधि के बाद भी बिना प्रस्वीकृति स्कूल संचालित पाए जाने पर प्रतिदिन 10 हजार रुपये का अतिरिक्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
इ-संबंधन पोर्टल पर आवेदन अनिवार्य
डीईओ ने स्पष्ट किया कि निजी स्कूलों की प्रस्वीकृति के लिए इ-संबंधन पोर्टल पर आवेदन करना अनिवार्य है. बिना प्रस्वीकृति कोई भी निजी विद्यालय संचालित नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि प्रखंड शिक्षा पदाधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे अपने क्षेत्रों में ऐसे विद्यालयों की पहचान कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करें.
