Tum Dena Saath Mera: सीरियल ‘तुम देना साथ मेरा’ की शुरुआत रक्षित और सुधा की बातचीत से होती है. सुधा, अपराजिता को मनाने की बात कहती है. रक्षित कहता है कि अपराजिता उससे प्यार नहीं करती और वह उसके फैसले को स्वीकार कर चुका है. दूसरी तरफ मालती रात भर सो नहीं पाती. वह रामगोपाल से अपनी चिंता साझा करती है. मालती को डर है कि आने वाले समय में जब अविनाश और आराध्या अपनी जिंदगी में आगे बढ़ जाएंगे, तब अपराजिता अकेली रह जाएगी. यह बात अपराजिता भी सुन लेती है.
अपराजिता के खिलाफ कुछ नहीं सुनेगा रक्षित
अगली सुबह मालती, अपराजिता को दही-चीनी खिलाकर नई शुरुआत के लिए शुभकामनाएं देती है. दूसरी तरफ रक्षित खुद से लड़ता दिखाई देता है. उसे एहसास है कि अब उसे रोज अपराजिता का सामना करना पड़ेगा. हालांकि घर के कुछ लोग अपराजिता पर रक्षित का फायदा उठाने का आरोप लगाते हैं, तब रक्षित उसके पक्ष में खड़ा हो जाता है. वह कहता है कि अपराजिता ने कभी दोस्ती की सीमा पार नहीं की और उसने जो भी फैसला लिया, वह उसका सम्मान करता है. इस बीच ललित की मां अपने बेटे को फटकार लगाती है. वह चाहती है कि किसी भी तरह अपराजिता को वापस घर लाया जाए. ललित बताता है कि अब पूरा परिवार अपराजिता के साथ खड़ा है.
ऑफिस में पहले दिन ही शुरू हुई नई चुनौती
नई नौकरी के पहले दिन अपराजिता ऑफिस पहुंचती है. इरा, अपराजिता को देखते ही नाराज हो जाती है और उसके देर से आने पर उसे डांटती है. मिस्टर दुबे उसे उसकी नई डेस्क दिखाते हैं और आईडी कार्ड देते हैं. वहीं रक्षित जानबूझकर उससे दूरी बनाए रखता है. अपराजिता उससे बात करने की कोशिश करती है, लेकिन वह नजरअंदाज कर देता है. दूसरी तरफ इरा फैसला करती है कि वह ऑफिस में अपराजिता का सफर आसान नहीं होने देगी.
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