Shatak Film Review: आज के बदलते दौर में जब सिनेमा अक्सर बड़े सेट, शोर और ग्लैमर के सहारे दर्शकों को आकर्षित करता है, वहीं शतक एक अलग रास्ता चुनती है. यह फिल्म बिना किसी दिखावे के अपने विषय को सादगी और संवेदनशीलता के साथ सामने लाती है. इसकी कहानी सिर्फ घटनाओं का क्रम नहीं, बल्कि विचार, अनुशासन और समाज के प्रति समर्पण की यात्रा है, जो धीरे-धीरे दर्शक के दिल में उतरती जाती है.
कहानी: इतिहास से वर्तमान तक का सफर
फिल्म की कहानी एक ऐसे संगठन की विचारधारा और यात्रा को दिखाती है, जिसने दशकों से समाज में अपनी पहचान बनाई है. कथा की शुरुआत केशव बलीराम हेडगेवार के जीवन से होती है, जिनकी सादगी और सोच कहानी की नींव बनती है. आगे बढ़ते हुए कथा एम. एस. गोलवलकर के दौर तक पहुँचती है, जहां बदलते सामाजिक हालात और चुनौतियों के बीच संगठन के काम को दर्शाया गया है. दादरा, नगर हवेली और कश्मीर जैसे मुद्दों को भी फिल्म शांत लेकिन प्रभावी तरीके से छूती है.
डायरेक्शन और लेखन: सहज, पर असरदार
निर्देशक आशीष मॉल ने फिल्म को बेहद वास्तविक अंदाज में पेश किया है. हर सीन ऐसा लगता है जैसे दर्शक उसी दौर का हिस्सा बन गया हो. राइटर्स ने कहानी को सरल रखा है, लेकिन उसके भीतर कई परतें छिपी हैं, जो धीरे-धीरे खुलती हैं और सोचने पर मजबूर करती हैं.
परफॉर्मेंस और प्रस्तुति
फिल्म में बड़े स्टार्स का शोर नहीं है, बल्कि साधारण चेहरे और सहज अभिनय है. यही इसकी सबसे बड़ी ताकत है. हर किरदार अपनी जगह पर सच्चा लगता है और दर्शक उससे जुड़ जाता है. बैकग्राउंड म्यूजिक और सिनेमैटोग्राफी कहानी के भाव को और गहरा बनाते हैं.
क्यों देखें यह फिल्म
‘शतक’ सिर्फ इतिहास नहीं दिखाती, बल्कि त्याग, अनुशासन और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देती है. यह फिल्म दर्शकों से सवाल पूछती है और उन्हें खुद जवाब ढूंढने के लिए प्रेरित करती है. अगर आप इस वीकेंड कुछ अलग और अर्थपूर्ण देखना चाहते हैं, तो यह फिल्म जरूर देखी जानी चाहिए.
डायरेक्शन: आशीष मॉल
प्रोड्यूसर: वीर कपूर
प्रोडक्शन: कृधान मीडियाटेक
राइटर्स: नितिन सावंत, रोहित गहलोत, उत्सव दान
रेटिंग: ⭐⭐⭐⭐☆ (3.5/5)
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