Ramayana Jai Jai Ram Song Review: नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षी फिल्म 'रामायण' को लेकर दावा किया जा रहा था ana Jai Jai Ram Song Reviewकि 4000 करोड़ के अभूतपूर्व बजट में बन रही यह सिनेमाई महागाथा भारतीय सिनेमा के सारे कीर्तिमान ध्वस्त कर देगी. ऑस्कर विजेता ए.आर. रहमान का संगीतमय जादू, डॉ. कुमार विश्वास की लेखनी और बॉलीवुड के दिग्गजों की फौज तैयारी तो ऐसी दिखाई गई थी जैसे कोई ऐतिहासिक चमत्कार होने वाला हो. लेकिन गणेश चतुर्थी के पावन मौके पर जब फिल्म का पहला आधिकारिक गाना 'जय जय राम' जारी हुआ, तो फैंस की उम्मीदों पर पानी फिर गया! जिस गाने से रोंगटे खड़े करने की उम्मीद थी, उसने आते ही दर्शकों को बुरी तरह निराश कर दिया है.
1975 के क्लासिक भजन की नकल, रहमान का म्यूजिक फेल
गाने की पहली ही तान 'राम सिया राम...' कान में पड़ते ही समझ आ जाता है कि इसमें नया कुछ भी नहीं है. 1975 की पौराणिक फिल्म 'जय बजरंगबली' में महान संगीतकार रवींद्र जैन द्वारा रचे और जसपाल सिंह द्वारा गाए गए अमर भजन की सीधी नकल उतार दी गई है. 51 साल पुरानी इस धुन पर सिर्फ आधुनिक वाद्य-यंत्रों और विशाल ऑर्केस्ट्रा का पॉलिश चढ़ाकर परोस दिया गया है. अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल जैसी दिग्गज जोड़ियों के होने के बावजूद गाना अपनी मौलिकता (Originality) की कमी के कारण बेअसर साबित होता है. फैंस सवाल उठा रहे हैं कि अगर रवींद्र जैन की ही धुन चेपनी थी, तो ए.आर. रहमान के नाम का इतना ढोल क्यों पीटा गया?
4 मिनट में पूरी फिल्म का कचरा, ओवर-एडिटिंग ने बिगाड़ा स्वाद!
गाने का विजुअल प्रेजेंटेशन देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि मेकर्स खुद घबराहट और कन्फ्यूजन का शिकार थे. महज 4 मिनट की समयावधि में सीता स्वयंवर, राम-जानकी विवाह, अयोध्या का उत्सव, वनवास और भरत का त्याग सब कुछ एक साथ ठूंसने की नाकाम कोशिश की गई है. जिस 'रामायण' की आत्मा उसकी ठहराव और सादगी में बसती है, उसे इस गाने ने एक हड़बड़ी में बने 3D वीडियो गेम के प्रोमो जैसा बना दिया है, जिससे दर्शक कनेक्ट नहीं कर पा रहे हैं.
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भारी VFX के पीछे दबी रणबीर-साई की केमिस्ट्री, सादगी का नामोनिशान नहीं
पर्दे पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रूप में रणबीर कपूर और माता सीता के रूप में साई पल्लवी के लुक्स को लेकर पहले से ही बहस जारी थी. 'नैचुरल और नो-मेकअप' लुक का दावा करने वाले मेकर्स की पोल वीएफएक्स के अति-इस्तेमाल ने खोल दी है. आधुनिक तकनीक और डिजिटल टच-अप के भारी-भरकम बोझ के तले दोनों कलाकारों के स्वाभाविक भाव पूरी तरह दबकर रह गए हैं. शिव धनुष तोड़ने का दृश्य हो या वन गमन का, स्क्रीन पर कृत्रिम भव्यता तो दिखती है, लेकिन वह भक्ति और आत्मिक गहराई गायब है जिसकी उम्मीद 4000 करोड़ के प्रोजेक्ट से की जा रही थी.
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