Film Review: देखने से पहले जानें कैसी है ”लव आजकल 2”

II उर्मिला कोरी II फ़िल्म- लव आजकल 2 निर्माता- दिनेश विजन निर्देशक -इम्तियाज़ अली कलाकार – कार्तिक आर्यन,सारा अली खान,रणदीप हुडा,आरुषि शर्मा और अन्य रेटिंग- डेढ़ सोचा ना था, जब वी मेट, लव आजकल और तमाशा जैसी फिल्मों से इम्तियाज़ अली की पहचान ऐसे निर्देशक के तौर पर स्थापित हो गयी है जो प्रेमकहानियां बनाने […]

II उर्मिला कोरी II

फ़िल्म- लव आजकल 2

निर्माता- दिनेश विजन

निर्देशक -इम्तियाज़ अली

कलाकार – कार्तिक आर्यन,सारा अली खान,रणदीप हुडा,आरुषि शर्मा और अन्य

रेटिंग- डेढ़

सोचा ना था, जब वी मेट, लव आजकल और तमाशा जैसी फिल्मों से इम्तियाज़ अली की पहचान ऐसे निर्देशक के तौर पर स्थापित हो गयी है जो प्रेमकहानियां बनाने में माहिर हैं. उनकी फिल्मों की कहानी में नयापन भले ही ना हो लेकिन उनका प्रस्तुतिकरण उन्हें खास बना जाता है। इस बार वह अपनी फिल्म लव आजकल का रिबूट लव आजकल 2 लेकर आए हैं.

कहानी में नयापन नहीं है लेकिन प्रस्तुतिकरण का वो फैक्टर गायब है जो इम्तियाज की फिल्मों को खास बनाता है. प्यार में लॉजिक तो नहीं मैजिक ज़रूर होता है जो इस फ़िल्म में नहीं है. इस बार की लव आजकल 2 में ना शानदार अभिनय है ,ना कलाकारों की उम्दा केमिस्ट्री और ना बेहतरीन संवाद. इम्तियाज़ पूरी तरह से चूक गए हैं. यह कहना गलत ना होगा.

कहानी की बात करें तो पिछली लव आजकल की तरह यहां भी दो कहानियां समानांतर चलती हैं. अलग अलग कालखंड में. एक मौजूदा दौर की दिल्ली की कहानी है तो दूसरी 90 के दशक की जयपुर की. दो अभिनेत्रियां हैं अभिनेता एक ही है.दोनों कालखंडों में अलग अलग लुक्स के साथ.

प्रेजेंट लव स्टोरी में लड़की यानी जोइ प्यार और करियर के बीच बैलेंस नहीं कर पा रही है तो वहीं फ्लैशबैक स्टोरी एक ऐसे कपल की है जहां लड़का लड़की के लिए घर परिवार सब छोड़ देता है लेकिन फिर वह उसे भी छोड़ देता है. दोनों कहानियां एक दूसरे के साथ टकराती हैं.

क्या फ्लैशबैक वाली कहानी की तरह ही प्रेजेंट वाली कहानी का भी दुखद अंत होगा. क्या होगा मौजूदा दौर वाली प्रेमकहानी का. यही आगे की कहानी। आरती बजाज की एडिटिंग ने दोनों कहानियों को बखूबी संवारा है. कैमरा वर्क भी कमाल का है लेकिन कहानी बेस्वाद रह गयी है ऐसे में लुक के क्या मायने.

इम्तियाज़ की फिल्मों में किरदार ग्रे होते हैं जिससे रिश्ते जटिल बन जाते हैं. कहानी इस बार भी जटिल है लेकिन वो कहना क्या चाहती है. ये समझ नहीं आता है. निजी जिंदगी और कैरियर के बीच सामंजस्य बिठाने का मुद्दा उठाया गया है लेकिन वो प्रभावी ढंग से नहीं आ पाया है. सोशल मीडिया पर मिले वीर को जोइ से पहली मुलाकात में ही वो स्पेशल कनेक्शन कैसे जुड़ जाता है।यह बात समझ नहीं आती है.

अभिनय पर आए तो सारा के किरदार को ज़्यादा आधुनिक दिखाने की कोशिश की गयी है. जिससे वे बनावटी सी लगती है और रही सही कसर उनकी एक्टिंग कर देती है. सारा फ़िल्म में बहुत ज़्यादा लाउड एक्टिंग करती नज़र आयी हैं. कार्तिक को उनके अब तक के कैरियर की सबसे सशक्त भूमिका मिली थी लेकिन वो उसे पर्दे पर उतारने में नाकामयाब रहे हैं. वे ना तो रघु बन पाए हैं और ना ही वीर.

कुलमिलाकर वे सैफ के आधे भी नहीं पहुँच पाते हैं. आरुषि शर्मा फ़िल्म में कम नज़र आयी हैं लेकिन वे आकर्षित करने में कामयाब रही हैं. रणदीप ठीक ठाक रहे हैं. लव आजकल की सफलता में उसके गानों का बहुत अहम योगदान था. आज भी उसके गाने लोगों की पसंद है.

इस फ़िल्म में प्रीतम ने पुरानी वाली लव आजकल की नागिन वाली ट्यून को सजाया है लेकिन गानों में वो जादू नहीं जग पाया है. गलत हो जा तू को छोड़कर कोई गाना अपील नहीं कर पाता है. फ़िल्म के संवाद की बात करें तो अभिनेताओं की एक्टिंग की तरह की वो अति नाटकीय है. कुलमिलाकर इम्तियाज अली 2009 वाली लव आजकल के जादू को परदे पर उतारने से चूक गए हैं.

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