मुंबई : टीवी अभिनेता आलोक नाथ पर यौन उत्पीड़न एवं बलात्कार का आरोप लगाने वाली लेखिका-निर्देशिका विंटा नंदा ने कहा कि वह इस बात को भली-भांति जानती हैं कि नाथ के साथ उनकी लड़ाई का कोई अंत नहीं है लेकिन लोगों के सहयोग की वजह से वह अब भी इस लड़ाई में बनी हुई हैं. निर्देशिका ने कहा कि ‘मी टू’ अभियान के दौरान वह अपने अगले कदम को सोचे बिना ही सामने आईं थी.
लाडली पहल की साझेदारी में स्क्रीनराइटर्स एसोसिएशन द्वारा ‘मी टू’ पर आयोजित एक पैनल डिस्कशन में विंता ने कहा, “हम सब जानते हैं कि इसका कोई अंत नहीं है. मैं कोई सबूत नहीं ला सकती, वह यह साबित नहीं कर सकते कि उन्होंने यह नहीं किया और यहां तक कि मैं भी यह साबित नहीं कर सकती कि उन्होंने ऐसा किया है. तो हम अदालत में किस बात के लिए लड़ रहे हैं? हम अदालत का समय क्यों बर्बाद कर रहे हैं? 20 साल पहले क्या हुआ इसका समर्थन करने के लिए कोई कानून नहीं है, न कोई अपेक्षा है.’
गौरतलब है कि विंटा नंदा ने फेसबुक पर लिखा था, ‘ एक बार मैं उनके घर पर पार्टी में गईं. देर रात दो बजे मैं वहां से निकल गई क्योंकि मुझे ठीक नहीं लग रहा था. मेरे ड्रिंक में कुछ मिला दिया गया था. मैं अकेले ही सड़क के किनारे चल पड़ी. कुछ दूर जाने पर एक कार मेरे पास आकर रूकी और उसने मुझे घर तक छोड़ने की बात कही. मैंने उस पर भरोसा किया और गाड़ी में बैठ गई. मैं बेहोश हो गई. मुझे हल्का याद है कि मेरे मुंह में शराब उड़ेली जा रही थी. गले दिन दोपहर को जब मैं उठी तो मुझे दर्द हुआ. सिर्फ मेरा रेप नहीं हुआ था मुझे मेरे घर लाकर बर्बाद किया गया था. मैं उठ नहीं पा रही थी.’
उन्होंने आईएनएस से इस बात की पुष्टि की और कहा कि, यह आलोक नाथ है. मुझे लगा संस्कारी कहना सही होगा.’ विंटा नंदा ने इस बात का भी खुलासा किया था कि इस घटना के बारे में उन्होंने आलोक नाथ की पत्नी आशु को भी इस बारे में बताया था लेकिन उन्होंने उनकी कोई मदद नहीं की थी. हालांकि आलोक नाथ इन आरोपों को सिरे से नकारा है.
