फिल्म रिव्यूः ओ तेरी को दो स्टार

।।उर्मिला कोरी।।... फिल्म: ओ तेरीनिर्देशक: उमेश बिष्टनिर्माता: अतुल अग्निहोत्री और अलवीरा अग्निहोत्रीकलाकार: पुलकित सम्राट, बिलाल अमरोही, सारा जेन डायस, अनुपम खेर, विजयराज और मंदिरा बेदीसंगीतकार: हार्ड कौर, जे जी सिंहरेटिंग:दो फिल्म बॉडीगार्ड के सफल निर्माता और सलमान खान के जीजा अतुल अग्निहोत्री ने सलमान खान के कहने पर 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल घोटाले और मीडिया […]

By Prabhat Khabar Digital Desk | March 28, 2014 7:26 PM

।।उर्मिला कोरी।।

फिल्म: ओ तेरी
निर्देशक: उमेश बिष्ट
निर्माता: अतुल अग्निहोत्री और अलवीरा अग्निहोत्री
कलाकार: पुलकित सम्राट, बिलाल अमरोही, सारा जेन डायस, अनुपम खेर, विजयराज और मंदिरा बेदी
संगीतकार: हार्ड कौर, जे जी सिंह
रेटिंग:दो

फिल्म बॉडीगार्ड के सफल निर्माता और सलमान खान के जीजा अतुल अग्निहोत्री ने सलमान खान के कहने पर 2010 दिल्ली राष्ट्रमंडल खेल घोटाले और मीडिया एवं नेताओं की मिलीभगत में चल रही देश लुटो नीति पर ओ तेरी बनायी है. फिल्म में पुलिकत सम्राट और बिलाल अमरोही पत्रकार के रूप में हैं, जो बड़े घोटाले की तलाश करते हैं, ताकि कार्यस्थल पर खुद को साबित कर सकें.

क्या मीडिया और नेताओं की इस मिलीभगत को यह दोनों पत्रकार आम आदमी के बीच ला पाएंगे. यह कहानी ओ तेरी की है. कहानी का थीम जरुर सशक्त लग रहा है लेकिन परदे पर जिस तरह से उसे पेश किया है. वह पूरी तरह से उबाऊ है. खास बात यह है कि यह फिल्म सिर्फ कॉमनवेल्थ घोटाले की कहानी ही नहीं बल्कि नीरा राडिया टेप कांड को भी अपनी कहानी में जोड़ती है. सिर्फ यही नहीं क्लासिक फिल्म जाने दो भी यारों से भी कहीं न कहीं प्रेरित है. खासकर लाश वाले सींस. इन सभी मुद्दों को कॉमेडी के अंदाज में परोसने के चक्कर में इन गंभीर मुद्दों का कबाड़ा बन गया है. फिल्म की स्क्रिप्ट और ट्रीटमेंट बेहतर होता तो चुनावी मौसम में इस फिल्म को भुनाया जा सकता था. सलमान की फिल्म जय हो के बाद यह फिल्म भी आम आदमी की बात करता है. फिल्म का फस्र्ट हाफ जबरदस्ती खीचा गया है जिससे सेकेंड हाफ में निर्देशक को जल्द कहानी खत्म करने की जरुरत महसूस हुई आखिर में फिल्म में कुछ संदेश भी देना रह गया है सो फिल्म के क्लाइमेक्स में जबरदस्त भाषणबाजी दिखी. फिल्म के कुछ संवाद जरुर रोचक है लेकिन फिल्म की कहानी और उसका ट्रीटमेंट निराशाजनक है. अभिनय की बात करें तो पुलकित सम्राट सलमान खान से प्रेरित नजर आते हैं.

वहीं नवोदित बिलाल अमरोही सोहेल खान से. दोनो की जुगलबंदी और संवाद अदाएगी का ढंग बहुत हद तक सलमान और सोहेल की ही याद दिलाता है. गौरतलब है कि बिलाल का लुक गानों में आकर्षक लग रहा है जबकि फिल्म में वह बिल्कुल अलग दिख रहे थे. सारा जेन डायस और मंदिरा बेदी को करने को कुछ खास नहीं था. विजय राज अभिनय के मामले में जरुर प्रभावी है. वह परदे पर जब भी दिखते हैं तो जरुर थोड़ी बहुत हंसी आती है लेकिन निर्देशक उनका ठीक से उपयोग नहीं कर पाएं हैं.अनुपम खेर इससे पहले भी ऐसे किरदार निभा चुके हैं. संगीत की बात करें तो फिल्म के शुरुआती कई गाने जबरदस्ती ठूंसे महसूस होते हैं. हर किरदार का गाने के साथ एंट्री वाला घिसपिटा फामरूला यहां भुनाया गया है. फिल्म के आखिर में सलमान खान वाला गीत जरुर अच्छा बन पड़ा है. निर्देशन के मामले में फिल्म बहुत कमजोर दिखती हैं. नवोदित निर्देशक उमेश बिष्ट अपनी इस फिल्म में कहानी और किरदार को ठीक से परदे पर गढ़ नहीं पाएं हैं. कुलमिलाकर ओ तेरी एक कमजोर फिल्म हैं.