Bollywood News: बाॅलीवुड में कई फिल्में आती हैं और चली जाती हैं, लेकिन कुछ कहानियां वक्त से आगे निकल जाती हैं. ऐसी ही एक फिल्म थी, जिसने बिना एक्शन और बिना शोर-शराबे के सिर्फ मोहब्बत और शायरी के दम पर इतिहास रच दिया. हम बात कर रहे हैं 1976 में रिलीज हुई उस क्लासिक फिल्म की, जिसे आज भी लोग बड़े प्यार से याद करते हैं, उस फिल्म का नाम है ‘कभी कभी’.
क्यों खास है ‘कभी कभी’?
27 फरवरी 1976 को रिलीज हुई ‘कभी कभी’ ने उस दौर में सिनेमाघरों में ऐसा जादू चलाया कि लोग महीनों तक इसे देखते रहे. यह फिल्म पूरे 50 हफ्तों तक थिएटर में लगी रही, जो अपने आप में एक बड़ा रिकॉर्ड था. डायरेक्टर यश चोपड़ा उस समय ‘दीवार’ और ‘दाग’ जैसी फिल्मों से ‘एंग्री यंग मैन’ का दौर मजबूत कर रहे थे. लेकिन ‘कभी कभी’ में उन्होंने बिल्कुल अलग रास्ता चुना. यह फिल्म न तो मारधाड़ पर टिकी थी और न ही बड़े एक्शन पर, बल्कि मशहूर शायर साहिर लुधयानवी की नज्म से जन्मी एक प्रेम कहानी थी. कहानी को आगे बढ़ाने में पामेला चोपड़ा का भी अहम योगदान रहा.
जब अमिताभ बने शायर
उस दौर में अमिताभ बच्चन ‘एंग्री यंग मैन’ के इमेज में ढल चुके थे. इंडस्ट्री के लोगों ने यश चोपड़ा को समझाया कि बंदूक उठाने वाले हीरो को अगर शायर बना दिया तो दर्शक शायद स्वीकार न करें. लेकिन यश चोपड़ा ने रिस्क लिया. फिल्म में अमिताभ को एक शायर के रूप में पेश किया गया. वहीं लीड रोल के लिए राखी गुलजार को चुना गया, जो उस समय फिल्मों से दूरी बनाए हुए थीं.
सुपरहिट गानें हैं फिल्म की जान
फिल्म का संगीत तैयार किया था खय्यम ने. उस वक्त उन्हें ‘अनलकी’ कहा जा रहा था, लेकिन यश चोपड़ा ने उन पर भी भरोसा किया और नतीजा सबके सामने था, कभी-कभी मेरे दिल में और मैं पल दो पल का शायर हूं जैसे दो सुपरहिट गाने सामने आए और आज भी लोगों की प्लेलिस्ट में शामिल हैं.
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