Awarapan 2 Review: OG शिवम is back, लेकिन vibe वही है या नहीं?

आवारापन 2 के साथ शिवम (इमरान हाशमी) वापस आ गए हैं. यह फिल्म मिलेनियल्स के लिए नॉस्टैल्जिया और जेन-ज़ी के लिए नया मिशन लेकर आई है. जानिए कैसी है यह फिल्म...

शिवम की वापसी का इंतजार उनके फैंस लंबे समय से कर रहे थे. आवारापन के गाने हों या मीम्स, मिलेनियल्स ने इस फिल्म की यादों को खूब जिया है. अब जब आवारापन 2 रिलीज हो चुकी है, एक जेन-ज़ी नजरिए से जानिए, मिलेनियल्स की इस फेवरेट कहानी की वापसी कैसी लगी.


वहीं से शुरू होती है OG शिवम की कहानी

अगर आपने आवारापन को पहली बार थिएटर में नहीं, बल्कि बाद में YouTube, सोशल मीडिया, मीम्स और गानों के जरिए जाना है, तो आवारापन 2 आपके लिए एक दिलचस्प एक्सपीरियंस हो सकती है. एक Gen-Z के नजरिए से कहूं तो फिल्म की सबसे बड़ी USP यही है कि यह पुराने शिवम को वापस लाती है, लेकिन उसकी कहानी को एक नए मिशन से जोड़ती है.

आवारापन 2 पहली फिल्म की घटनाओं के बाद शुरू होती है. शिवम आज भी आलिया की यादों में जी रहा है. उसकी जिंदगी में बदलाव तब आता है, जब उसे आलिया की कब्र के पास एक नवजात बच्ची मिलती है. वह बच्ची को अनाथालय पहुंचाता है और उसका नाम भी आलिया रख देता है.धीरे-धीरे शिवम और बच्ची के बीच एक गहरा रिश्ता बन जाता है. लेकिन जब उसे पता चलता है कि आलिया ह्यूमन ट्रैफिकिंग के जाल में फंस चुकी है, तो उसकी पूरी जिंदगी का मकसद बदल जाता है. अब वह उसे बचाने के लिए बैंकॉक के अंडरवर्ल्ड और इंटरपोल की दुनिया में उतरता है.

यानी इस बार शिवम की लड़ाई सिर्फ प्यार के लिए नहीं, बल्कि एक बच्ची को बचाने और इंसानियत के लिए है. इमोशन, एक्शन, बदला और दर्द को कहानी में साथ लेकर चलने की कोशिश की गई है.

परफॉर्मेंस और एक्सप्रेशन

Gen-Z के लिए शायद शिवम उतना personal character न हो, जितना मिलेनियल्स के लिए है, लेकिन इमरान हाशमी की स्क्रीन प्रेजेंस आज भी कमाल की है. लंबे बाल, इंटेंस आंखें और चेहरे पर वही दर्द—OG शिवम की vibe को बरकरार रखा गया है.इमरान की सबसे बड़ी ताकत उनकी इंटेंस एक्टिंग है. शिवम का दर्द और गुस्सा कई जगह सीधे कनेक्ट करता है. हालांकि पहली फिल्म जैसी इमोशनल डेप्थ हर जगह नहीं मिलती, लेकिन इमरान अकेले कई कमजोर हिस्सों को संभाल लेते हैं.

अगर फिल्म में कोई किरदार इमरान को टक्कर देता है, तो वह है जोरावर. उसकी स्क्रीन प्रेजेंस, क्रूरता और बैकस्टोरी फिल्म को काफी इंट्रेस्टिंग बनाती है.कई सीन्स में जोरावर की एंट्री और उसका अंदाज शिवम से भी ज्यादा लाइम लाइट ले जाता है. उसका किरदार टिपिकल फिल्मी विलेन से थोड़ा ज्यादा लेयर्ड है और यही फिल्म के सबसे अच्छे हिस्सों में से एक है. दिशा पाटनी स्क्रीन पर बेहद ग्लैमरस नजर आती हैं, लेकिन एक्टिंग के मामले में फिल्म उन्हें बहुत ज्यादा एक्सप्लोर नहीं करती. इमोशनल सीन्स में उनके एक्सप्रेशन और डायलॉग डिलिवरी काफी फ्लैट लगते हैं.शबाना आजमी का स्क्रीन टाइम कम है, लेकिन उनकी मौजूदगी इंपैक्टफुल है.बता दें, उनका किरदार ये हिंट भी देता है कि फिल्म के सीक्वल की गुंजाइश है. वहीं पूरन गब्बी, सुविंदर विक्की और विजयंत कोहली समेत बाकी कलाकार भी अपने-अपने किरदारों में ठीक काम करते हैं.

nostalgia फैक्टर लाने में सक्सेसफुल रही म्यूजिक

आवारापन की बात हो और म्यूजिक को इग्नोर कर दिया जाए, ऐसा हो ही नहीं सकता.सीक्वल में म्यूजिक और BGM (बैकग्राउंड म्यूजिक) फिल्म के इमोशनल मोमंट को मजबूत करते हैं. आतिफ असलम की आवाज आते ही मिलेनियल दर्शकों के लिए nostalgia स्वीच ऑन हो सकता है. Gen-Z के लिए भी ये गाने कहानी के मूड को समझने में मदद करते हैं.

VFX: यहां थोड़ा और काम चाहिए था

फिल्म की सबसे बड़ी टेक्निकल इसके कुछ VFX और एक्शन सीक्वेंस हैं. कई जगह एक्शन आर्टिफिसियल सा लगता है.कुछ मारधाड़ वाले सीक्वेंस और खासकर शिवम के बच निकलने वाले moments थोड़े ओवर द टॉप लगते हैं. फिल्म के 140 मिनट के रनटाइम को भी थोड़ी और क्रिस्प एडिटिंग का फायदा मिल सकता था.

डायलॉग कभी दिल छूते हैं, कभी cringe लगते हैं

फिल्म में शिवम के दर्द और उसकी सोच को एक्सप्रेस करने वाले कुछ अच्छे डायलॉग्स हैं. लेकिन कई जगह मेकर्स ने डायलॉग्स को जरूरत से ज्यादा फिलॉसिफिकल बनाने की कोशिश की है.जहां सिंपल और नैचुरल ज्यादा असर करता, वहां कुछ लाइन्स थोड़ी जबररन लगती हैं. Gen-Z ऑडियंस के लिए ये हिस्सा थोड़ा ज्यादा ड्रामैटिक लग सकता है.

फाइनल वर्डिक्ट

एक Gen-Z व्यूवर के तौर पर आवारापन 2 को देखना थोड़ा अलग एक्सपीरियंस है. यह वह फिल्म नहीं है जिसे सिर्फ nostalgia के भरोसे देखा जाए. इसमें एक नई कहानी, नया ट्विस्ट और शिवम का एक नया मिशन है.OG शिवम की वापसी, इमरान हाशमी music और जोरावर का दमदार किरदार फिल्म की सबसे बड़ी ताकत हैं. वहीं VFX, कुछ एक्शन सीक्वेंस, ओवर ड्रामैटिक डायलॉग्स और दिशा पाटनी की एक्टिंग इसकी कमजोरियां हैं. तो क्या आवारापन 2 OG आवारापन की बराबरी कर पाती है? पूरी तरह नहीं. लेकिन क्या यह शिवम की कहानी को दोबारा देखने की वजह देती है? बिल्कुल.

कुल मिलाकर, आवारापन 2 एक इंपरफेक्ट लेकिन इमोशनल सीक्वल है. मिलेनियल्स के लिए यह nostalgia ट्रिप हो सकती है और Gen-Z के लिए OG शिवम की दुनिया को जानने का मौका. और हां, क्लाइमैक्स साफ इशारा करता है कि कहानी अभी खत्म नहीं हुई है.शायद अगली बार शिवम का चैप्टर और बड़ा हो.

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लेखक के बारे में

By नेहा वर्मा

Neha Verma is an entertainment journalist with over 11 years of experience in Bollywood and digital journalism. She has worked with leading media brands including Aaj Tak, Navbharat Times and Dainik Jagran, reporting on celebrities, films, television and the wider entertainment industry. Known for her exclusive stories and breaking news coverage, she has worked in both Delhi and Mumbai. She currently heads the Entertainment section at Prabhat Khabar Digital.

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