dacoit ek prem katha movie :तेलुगु सिनेमा के स्टार अदिवि शेष एक बार फिर हिंदी दर्शकों को एंटरटेन करने के लिए बड़े पर्दे पर लौट आए हैं. उनकी फिल्म ‘डकैत : एक प्रेम कथा’ ने सिनेमाघरों में दस्तक दे दी है. एंग्री लव स्टोरी के रूप में पेश की जा रही इस फिल्म को अदिवि शेष पैन इंडिया फिल्म नहीं, बल्कि एक बहुभाषीय प्रोजेक्ट मानते हैं, क्योंकि इसे सिर्फ डब नहीं किया गया, बल्कि हिंदी और तेलुगु दोनों भाषाओं में अलग-अलग शूट किया गया है. इस फिल्म पर उर्मिला कोरी से हुई उनकी खास बातचीत के अंश.
इस फिल्म का आइडिया कैसे आया?
यह आइडिया इस सोच से आया कि अगर दो लोगों की प्रेम कहानी हिंसा के माहौल, रेल की पटरियों, पत्थरों, गोलियों और बंदूकों के बीच बुनी जाये, तो वह कैसी दिखेगी? इसी सोच के बीच ‘डकैत’ की कहानी आयी. हमारे यहां रोमांटिक फिल्मों में प्रयोग के नाम पर अक्सर रोमांटिक कॉमेडी या ट्रैजिक लव स्टोरी ही बनती रही हैं, लेकिन एक्शन के सेटअप में प्रेम कहानी कहना हमारे लिए एक बिल्कुल नया और दिलचस्प प्रयोग था.
डकैत की जर्नी कैसी रही है?
‘डकैत’ मेरे लिए एक जुनूनी प्रोजेक्ट रहा है. मेरे बेस्ट फ्रेंड शेनिल देव इसके डायरेक्टर हैं. उनकी हिंदी अच्छी है और मेरी तेलुगू, इसलिए हमने इसे दो अलग प्रोजेक्ट्स की तरह शूट किया है. फिल्म का हर डायलॉग और सीन पहले हिंदी में, फिर तेलुगू में शूट किया गया. दोनों भाषाओं के दर्शकों की संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए हमने इसे अलग-अलग ढंग से फिल्माया है. यह करीब ढाई साल की यात्रा रही है और अब फिल्म 10 अप्रैल को रिलीज होने जा रही है, जिसे लेकर मैं बेहद उत्साहित हूं.
डकैत के आप लेखक भी हैं ?
मैं एक आउटसाइडर हूं. जिस तरह के रोल और किरदार मैं करना चाहता था, शुरुआत में वे मुझे नहीं मिल रहे थे, इसलिए मैं खुद फिल्मों की राइटिंग से जुड़ गया. और आज वही मेरी पहचान बन गयी है. अब तो लोग मानते हैं कि अगर मैं किसी फिल्म के लेखन से जुड़ा हूं, तो वह अच्छा ही होगा.
‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’ गाने को फिल्म में इस्तेमाल किया गया है. उस गाने से जुड़ी आपकी क्या यादें रही हैं?
‘तू चीज बड़ी है मस्त मस्त’ गाने से जुड़ी मेरी यादें बचपन की हैं. स्कूल में एक बार हम अपने एक दोस्त का बर्थडे मना रहे थे. टीचर ने बोला कि किसी को डांस करना है, तो वह कर सकता है. उस वक्त यह मेरा फेवरेट गाना था. मेरी जिंदगी में यह पहला मौका था, जब मैंने सबके सामने डांस परफॉर्म किया और वह इसी खास गाने पर था. वैसे फिल्म में इस गाने को शामिल करने की एक खास वजह है, जो फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगी.
‘धुरंधर 2’ की आंधी बॉक्स ऑफिस पर चल रही है. क्या आपको लगता है कि वह आपकी फिल्म को प्रभावित करेगी?
कला में प्रतिस्पर्धा नहीं होती. रेस में कोई एक मिनट में फिनिश करता है, कोई 45 सेकेंड में, तो पता चल जाता है कि विजेता कौन है, लेकिन आर्ट में ऐसा नहीं होता. आप अपनी एक्टिंग को स्लोडाउन नहीं कर सकते कि कोई और कैचअप कर ले. आदित्य धर मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. मुझे खुशी है कि ‘धुरंधर’ देश की सबसे बड़ी फिल्म बन गयी है.
फिल्म का शीर्षक ‘डकैत’ रखने की कोई खास वजह?
मुझे रेट्रो चीजों से हमेशा लगाव रहा है. तेलुगु फिल्मों में मुझे पहचान ‘गुड़ाचारी’ से मिली. उस फिल्म का नाम सुनकर कई लोगों ने कहा कि इसे ‘जासूस’ या कोई ज्यादा स्वैग वाला नाम रखो, लेकिन मैंने वही पुराना नाम रखा, जिसका मतलब हिंदी में ‘गुप्तचर’ होता है, और लोगों को वह पसंद भी आया. ‘डकैत’ भी इसी सोच से निकली है. आज के समय में कोई डकैत कैसे बनता है और उसकी प्रेम कहानी कैसी होगी, यही इसका आधार है.
अनुराग कश्यप के साथ अनुभव कैसा रहा?
वह बहुत ही प्योर सोल हैं. वह बिना किसी डिप्लोमेसी या फिल्टर के बात करते हैं. ऐसे लोग बहुत कम होते हैं और अनुराग उन्हीं में से एक हैं. फिल्मों को समझने का उनका क्राफ्ट बेहद खास है. मैं बताना चाहूंगा कि मेरी फिल्म के लिए उन्होंने टॉम क्रूज की फिल्म तक को मना कर दिया था. आप समझ सकती हैं कि उनमें कितनी खास बात है. उनकी हिंदी पर पकड़ भी कमाल की है. कई बार सेट पर लगा कि हमें हिंदी का एक बेहतरीन डायलॉग राइटर फ्री में मिल गया है.
