chetna pande :टिकट खिड़की पर हॉलीवुड की हॉरर थ्रिलर फिल्म "ऑब्सेशन" की जबरदस्त सफलता के बीच विक्रम भट्ट की हॉरर फिल्म "हॉन्टेड थ्री डी" भी सुर्खियां बटोरने में कामयाब हुई थी.इस फिल्म की कास्टिंग से मिमोह चक्रवर्ती के साथ अभिनेत्री चेतना पांडे का नाम जुड़ा हुआ है. इस हॉरर फिल्म में चेतना पांडे के बोल्ड सीन्स पर भी काफी बातें हुई. इन बोल्ड सीन्स की शूटिंग को याद करते हुए चेतना पांडे बताती हैं कि हमेशा सुरक्षित, सम्मानित और सपोर्टेड सेट पर महसूस उन्हें कराया गया था. एक्टर्स के लिए कुछ सीन ऐसे होते हैं जो उन्हें चुनौती देते हैं, और कुछ सीन ऐसे होते हैं जो कैमरा बंद होने के बाद भी लंबे समय तक उनके साथ रहते हैं. इस फिल्म के बोल्ड और इमोशनली इंटेंस सीन ने मुझे पूरी तरह से कम्फर्ट ज़ोन से बाहर निकाल दिया था. मैं इस बात को भी स्वीकार करना चाहूंगी.
सुनहरी में पूरी तरह से डूब गयी थी
इस फिल्म में चेतना सुनहरी की भूमिका को निभा रही हैं.वह बताती हैं कि स्क्रिप्ट पढ़ने के पल से ही मुझे पता था कि इस किरदार का सफ़र गहरे ट्रॉमा, डर और इमोशनल कमज़ोरी से भरा हुआ है. इसका मतलब था कि इस परफ़ॉर्मेंस को मैकेनिकल तरीके से नहीं किया जा सकता था.इसके लिए मुझे इमोशनली उसकी दुनिया में उतरना पड़ा और जब मैंने ऐसा किया, तो कुछ सीन का इमोशनल असर उम्मीद से कहीं ज़्यादा गहरा हुआ.शूटिंग के दौरान कुछ पल ऐसे थे जो सचमुच परेशान करने वाले थे क्योंकि मैं सुनहरी की असलियत में पूरी तरह डूबी हुई थी. मुझे एक खास सीन याद है जिसमें किरदार के साथ बहुत ही परेशान करने वाले तरीके से ज़्यादती होती है, और पहली बार मुझे सच में उस बेचैनी, बेबसी और डर का एहसास हुआ जो बहुत सी औरतें तब महसूस करती हैं जब उनकी सीमाओं का उल्लंघन होता है. सीन खत्म होने के काफी समय बाद भी उस इमोशन का असर मेरे साथ बना रहा.
कम क्रू के साथ बोल्ड सीन शूट हुआ था
सुनहरी के किरदार में बोल्ड और इंटेस सीन्स के शूटिंग को याद करते हुए चेतना बताती हैं कि किरदार और सीन आसान नहीं थे लेकिन जिस चीज़ ने इस अनुभव को आसान बनाया, वह था विक्रम सर का बनाया हुआ माहौल. उन्होंने हर मुश्किल सीन को बहुत संवेदनशीलता, समझदारी और सम्मान के साथ शूट किया. इसमें कभी भी कोई सनसनीखेज बात नहीं थी.सेट पर बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से काम हुआ. सबसे संवेदनशील दृश्यों के दौरान, सिर्फ़ ज़रूरी क्रू मेंबर ही मौजूद थे. मॉनिटर या शूटिंग वाली जगह के आस-पास किसी भी गैर-ज़रूरी व्यक्ति को आने की इजाज़त नहीं थी. एक एक्टर के तौर पर, सुरक्षा और भरोसे का यह एहसास बहुत ज़रूरी है और विक्रम सर ने सेट पर मुझे यह माहौल दिया तभी मैं सुनहरी के किरदार को परदे पर आत्मसात कर पायी.
