Success Story Chirag Maru: कुछ लोग पढ़ाई में आगे निकलते हैं, कुछ लोग अपनी जिंदगी में ऐसा मकसद तलाश लेते हैं जो उन्हें सबसे अलग बना देता है. लेकिन अगर कोई पढ़ाई में भी टॉप करे और साथ ही भक्ति के रास्ते पर भी आगे बढ़े, तो कहानी थोड़ी खास हो जाती है. आज की कहानी ऐसे ही एक युवा की है, जिनकी पहचान सोशल मीडिया पर 'IIT Wale Prabhu' के नाम से है.
Success Story Chirag Maru: कौन हैं चिराग मारु?
चिराग भावनगर, गुजरात के रहने वाले हैं. उनके पिता खेंगरभाई हरिभाई मारु एक रियल एस्टेट बिजनेसमैन हैं और मां लाभुबेन खेंगरभाई मारु एक होममेकर हैं. चिराग ने अपनी स्कूलिंग Silver Bells Public School से की और क्लास 12वीं में 96.6% स्कोर किया. यानी शुरू से ही पढ़ाई में मन लगा हुआ था. लेकिन असली कहानी तो अभी शुरू हुई थी.
IIT या NIT, सवाल था बड़ा
जब कॉलेज चुनने का टाइम आया, चिराग के पास IIT और NIT दोनों जगह मौके थे. घर से दूर जाना आसान डिसीजन नहीं था, लेकिन उनके बड़े पापा ने उन्हें IIT खड़गपुर चुनने के लिए हौसला दिया. चिराग ने IIT खड़गपुर में BS-MS में एडमिशन ले लिया.
आज चिराग इस डिसीजन पर गर्व महसूस करते हैं. उनके शब्दों में, "IIT खड़गपुर ने मुझे बहुत एक्सपोजर और सीखने के मौके दिए.
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IIT खड़गपुर पहुंचते ही बदलने लगी कहानी
IIT खड़गपुर सिर्फ चिराग के लिए पढ़ाई और डिग्री हासिल करने की जगह नहीं रहा. यहीं उन्हें कुछ ऐसे लोगों का साथ मिला, जिसने उनकी सोच और जिंदगी दोनों को एक नई दिशा दी.
पहले साल में उनकी मुलाकात Team Awaken नाम के एक ग्रुप से हुई. यह ग्रुप गीता क्लासेज आयोजित करता था. यहीं से चिराग का परिचय भगवद्गीता से हुआ. धीरे-धीरे उन्होंने हरे कृष्ण महामंत्र का जाप शुरू किया और कृष्ण भावनामृत को अपनी जिंदगी का हिस्सा बना लिया.
चिराग के मुताबिक, इस मुलाकात ने जिंदगी को देखने का उनका नजरिया ही बदल दिया. उन्हें इंसानी जीवन के मकसद और उसे बेहतर तरीके से जीने की अहमियत समझ में आने लगी.
परिवार का मिला सपोर्ट
चिराग अपने माता-पिता के बेहद आभारी हैं. उनका कहना है कि उनके माता-पिता ने कभी किसी खास ग्रेड या नंबर के लिए उन पर दबाव नहीं बनाया. इसके बजाय हमेशा उनका साथ दिया. शायद यही वजह रही कि चिराग ने पढ़ाई को बोझ की तरह नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी और पसंद की तरह लिया.
अपने माता-पिता के अलावा चिराग अपने आध्यात्मिक मार्गदर्शकों हिज ग्रेस दाऊजी कृपा प्रभु और हर्ष प्रिया प्रभु का भी आभार जताते हैं. जिन्होंने मुश्किल समय में उनका मार्गदर्शन किया.
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किताबों के साथ AI भी बना साथी
आज के दौर में पढ़ाई का तरीका भी तेजी से बदल रहा है. चिराग भी इससे अछूते नहीं रहे. उन्होंने पढ़ाई के दौरान AI का इस्तेमाल किया. उनके मुताबिक, AI ने मुश्किल कॉन्सेप्ट्स को समझने, डाउट्स क्लियर करने और किसी टॉपिक को अलग-अलग नजरिए से एक्सप्लोर करने में काफी मदद की.
IIT में टॉपर, हाथ आया सिल्वर मेडल
चिराग मारु ने IIT खड़गपुर से केमिस्ट्री में BS-MS की डिग्री हासिल की. इतना ही नहीं, वह अपने डिपार्टमेंट के टॉपर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल भी मिला. एक तरफ चिराग भक्ति के रास्ते पर आगे बढ़ रहे थे और दूसरी तरफ पढ़ाई में भी पूरी मेहनत कर रहे थे.
चिराग मारु यानी 'IIT Wale Prabhu' बताते हैं कि IIT से पढ़ाई पूरी करने के बाद अब उनका लक्ष्य सिविल सर्विसेज की तैयारी करना है. वह भविष्य में देश की सेवा करना चाहते हैं.
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