Jharkhand IT Engineer Success Story: झारखंड का एक जिला है रामगढ़ जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ कोयला उद्योग होने के लिए भी जाना जाता है. एक तरफ यहां रोजगार, पैसा और खुशहाली है तो वहीं दूसरी तरफ फैक्ट्री और इंडस्ट्री के कारण यहां के स्कूल कभी बंद हो जाते हैं और कई बार किलोमीटर में बहुत दूर. हालत ये है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा हासिल करने के लिए कई किलोमीटर का सफर तय करके स्कूल जाना पड़ता है. हालांकि, बस सुविधा से उनकी मुश्किल थोड़ी आसान हो जाती हैं.
IT Engineer ने अपने सपने के लिए छोड़ा लाखों का पैकेज
इसी मुश्किल को पहचानने के बाद नितेश कुमार (IT Engineer Nitesh Kumar) ने यहां स्कूल खोलने का फैसला लिया. नितेश की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि वो इसी जिले के निवासी हैं और उन्होंने अपने क्षेत्र के लिए लाखों की पैकेज वाली नौकरी छोड़ दी. नितेश कुमार जॉब के सिलसिले में मेट्रो सिटी चले गए थे और जब वापस लौटकर आए तो उन्हें रियालिटी चेक मिला. क्षेत्र में एक भी अच्छा और सस्ता स्कूल नहीं था.
कोविड-19 ने बदल दी जिंदगी
नितेश का जन्म रामगढ़ जिले (Ramgarh News) के घाटो क्षेत्र में हुआ. उन्होंने शुरुआती पढ़ाई अपने गृह जिले से पूरी की. इंजीनियरिंग की पढ़ाई उन्होंने कर्नाटक के शिमोगा से की. BTech की डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने बेंगलुरु, दिल्ली समेत कई शहरों में IT सेक्टर में नौकरी की. उनकी लाइफ अच्छी चल रही थी. फिर कोविड -19 का दौर आया और नितेश वर्क फ्रॉम होम लेकर घर लौटे.
नितेश कहते हैं-
कोविड 19 ने मुझे वो मौका दिया, जिसकी वजह से मैं अपने जिले के लिए कुछ कर पाया. आमतौर पर प्राइवेट नौकरी करने वाले युवक जॉब छोड़कर कुछ नया नहीं कर पाते हैं. लेकिन वर्क फ्रॉम होम ने मुझे ये मौका दिया कि मैं रामगढ़ के आसपास के इलाके को एक्सप्लोर कर पाऊं. फिर मुझे स्कूल खोलने का आईडिया आया.
यहां उन्होंने देखा कि एक 5 साल के बच्चे को स्कूल जाने के लिए 20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है. आम घरों के बच्चों या मजदूर वर्ग के बच्चों की पढ़ाई ऐसे में प्रभावित होने लगी. ऐसे में नितेश कुमार ने नव गुरुकुल वर्ल्ड स्कूल की स्थापना की.
कहां से मिली स्कूल खोलने की प्रेरणा?
नितेश कुमार जब घर लौटे तो उन्होंने देखा कि यहां उनके जिले में प्राथमिक शिक्षा के लिए एक भी अच्छा स्कूल नहीं है. ऐसे में उन्होंने स्कूल खोलने का फैसला लिया. मई 2024 में नितेश कुमार ने अपनी पुश्तैनी जमीन पर स्कूल खोला. हालांकि, इसके लिए उन्हें लोन भी लेना पड़ा. लेकिन उन्होंने तब तक हार नहीं मानी जब तक स्कूल बनाने का काम पूरा नहीं हो गया.
शाम को IT सेक्टर के लिए करते हैं काम
दिलचस्प बात ये है कि नितेश कुमार न सिर्फ स्कूल चलाते हैं बल्कि स्कूल के शिक्षकों की सैलरी और दूसरे खर्च निकालने के लिए आज भी शाम के वक्त में IT सेक्टर में फ्रीलांस करते हैं. जहां इस इलाके के दूसरे प्राइवेट स्कूल की महंगी फीस है, वहीं नितेश केवल 800 रुपये की फीस लेते हैं.
झारखंड के युवाओं के लिए पेश की मिसाल
झारखंड के रामगढ़ जिले के इंजीनियर नितेश कुमार की कहानी उन युवाओं के लिए मिसाल है, जो अच्छी नौकरी और करियर के साथ समाज के लिए कुछ करने का सपना देखते हैं. नितेश ने IT सेक्टर में नौकरी की, कई बड़े शहरों में रहे, लेकिन जब अपने गांव और आसपास के इलाकों की शिक्षा व्यवस्था को करीब से देखा तो उन्होंने अपना करियर ही नहीं, बल्कि अपने काम करने का तरीका भी बदल दिया.