Medical Career without Biology: मेडिकल का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में डॉक्टर का ख्याल आता है. अगर आपने 12वीं में बॉयलोजी नहीं पढ़ी है और फिर भी मेडिकल से जुड़ना चाहते हैं तो आप हेल्थकेर सेक्टर में करियर बना सकते हैं. आज के समय में हॉस्पिटल, मेडिकल टेक्नॉलजी और हेल्थ मैनेजमेंट जैसे फील्ड मे कई ऐसे कोर्स हैं जिनमें फिजिक्स, कैमिस्ट्री और मैथ्स (PCM), Commerce या Arts बैकग्राउंड के स्टूडेंट्स भी करियर बना सकते हैं.
कौन-कौन से कोर्स कर सकते हैं?
- हॉस्पिटल मैनेजमेंट: इस कोर्स में एडमिशन लेने के लिए किसी भी स्ट्रीम से स्टूडेंट्स 12वीं पास होना चाहिए. इस कोर्स को पूरा करने के बाद आप हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेटर, ऑपरेशंस मैनेजर, हेल्थकेयर कंसल्टेंट, मेडिकल रिकॉर्ड मैनेजमेंट जैसे काम के लिए योग्य हो जाते है. इस फील्ड में आपके लिए फाइनेंस एंड बजेटिंग, प्रॉब्लम सॉल्विंग, कम्युनिकेशन जैसी स्किल्स फायदेमंद होंगी.
- मेडिकल कोडिंग: इस कोर्स में एनरॉल करने के लिए आपके पास 12वीं की या ग्रेजुएशन की डिग्री होना अनिवार्य है. मेडिकल कोडर्स का काम होता है मेडिकल रिपोर्ट का एनालिसिस करना, बीमारी और इलाज की प्रोसेस के अनुसार सही यूनिवर्सल अल्फान्यूमेरिक कोड चुनना और डॉक्यूमेंट्स में एरर प्रीवेन्शन (error prevention) का ध्यान रखना.
- मेडिकल इक्विप्मेंट मैनेजमेंट: इसमें सर्टिफिकेट कोर्स या डिप्लोमा कोर्स करने के लिए 10वीं-12वीं पास होना जरूरी है. वहीं अगर पोस्ट-ग्रेजुएशन डिप्लोमा में मैनेजमेंट सर्टिफिकेट के लिए BA इन बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और साइंस से रिलेटेड फील्ड में होना चाहिए. मेडिकल इक्विप्मन्ट मैनेजर MRI, सीटी स्कैन, एक्स-रे जैसी मशीनों की इंस्टॉलेशन, मेंटेनेंस और टेक्निकल सपोर्ट का काम किया जाता है. यह फील्ड PCM वाले स्टूडेंट्स के लिए बेहतर साबित हो सकता है.
- हेल्थकेयर डेटा एनालीसिस्ट: वह होता है जो अस्पतालों, हेल्थकेयर कंपनियों और रिसर्च संस्थानों के मेडिकल डेटा का एनालिसिस करता है. इसका मोटिव मरीजों की केयर बेहतर बनाना, बीमारी के ट्रेंड समझना. इस क्षेत्र में डेटा एनालिटिक्स, एक्सेल, SQL और Python जैसी स्किल्स की मांग रहती है.
- बायोमेडिकल इंजीनियरिंग: इसमें एडमिशन के लिए PCM या PCB सब्जेक्ट से 12वीं होनी चाहिए. स्टूडेंट्स जिन्हें बायोलॉजी और टेक्नोलॉजी दोनों में रुचि है, उनके लिए अच्छा विकल्प है. यह एक ऐसा फील्ड है जिसमें इंजीनियरिंग और मेडिकल साइंस दोनों का मेल होता है. इसमें मेडिकल डिवाइस (जैसे MRI मशीन, आर्टिफिशियल लिम्ब्स, पेसमेकर) डिजाइन किए जाते हैं. इस फील्ड के प्रोफेशनल्स हॉस्पिटल्स, मेडिकल डिवाइस कंपनियों और रिसर्च लैब्स में काम करते हैं.
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किन कॉलेजों से कर सकते हैं पढ़ाई?
इन कोर्सेज की पढ़ाई देश के कई फेमस कॉलेजों में कराई जाती है-
- ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेस (AIIMS)
- राजेन्द्र इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस (RIMS), (रांची)
- टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS)
- इंस्टीट्यूट ऑफ गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिसेज इंडिया (IGMPI), (दिल्ली)
- IIHMR यूनिवर्सिटी, (राजस्थान)
- सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ साइंसेज, (SIHS), पुणे
- IIT हैदराबाद, IIT मद्रास, IIT कानपुर, NIT राउरकेला जैसे सरकारी कॉलेज शामिल हैं.
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