Junction VS Terminal: भारतीय रेलवे में सफर के दौरान आपने कई स्टेशनों के नाम के साथ Junction या Terminal लिखा जरूर देखा होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन दोनों का मतलब अलग-अलग होता है? अक्सर लोग इन शब्दों को बोलचाल में जरूर लाते हैं, लेकिन कम ही हैं, जिन्हें इसका मतलब पता होता है.
क्या होता है Junction?
जंक्शन वह रेलवे स्टेशन होता है, जहां से कम से कम तीन अलग-अलग दिशाओं में रेलवे लाइनें निकलती हैं. जैसे कि पटना जंक्शन में पश्चिम / उत्तर भारत रूट (दानापुर, आरा, बक्सर और पंडित दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन की ओर), पूर्व / कोलकाता रूट (फतुहा, किउल और झाझा की ओर) और दक्षिण रूट (जहानाबाद और गया जंक्शन की ओर) ट्रेन निकलती है. ऐसे स्टेशन पर पहुंचने के बाद ट्रेनें अलग-अलग रूट पर जा सकती हैं यानी जंक्शन रेलवे नेटवर्क का एक महत्वपूर्ण कनेक्टिंग प्वॉइंट होता है.
क्या होता है Terminal?
टर्मिनल (या टर्मिनस) वह स्टेशन होता है, जहां रेलवे ट्रैक एंड करता है. यहां से ट्रेन आगे उसी लाइन पर नहीं जा सकती. टर्मिनल स्टेशन पर ट्रेन का सफर खत्म होता है या फिर ट्रेन वापस उसी दिशा में रवाना होती है.
अब जैसे पटना के राजेंद्र नगर टर्मिनल की बात करें तो इसे इसलिए बनाया गया था कि पटना जंक्शन का भार कम किया जा सके. इसे प्रमुख ट्रेनों के शुरुआती और अंतिम ठहराव (Origination/Termination Point) के रूप में विकसित किया गया था.
जंक्शन और टर्मिनल में क्या है अंतर?
| Junction | Terminal |
| कम से कम तीन दिशाओं में रेलवे लाइनें जुड़ी होती हैं. | रेलवे लाइन का अंतिम स्टेशन होता है. |
| ट्रेनें अलग-अलग रूट पर जा सकती हैं. | ट्रेनें आगे नहीं जातीं, यहीं से लौटती या यात्रा समाप्त करती हैं. |
| रेलवे नेटवर्क का कनेक्टिंग पॉइंट होता है. | यात्रा का शुरुआती या अंतिम पड़ाव होता है. |
स्टेशन के नाम के साथ ये शब्द क्यों जोड़े जाते हैं?
रेलवे स्टेशन के नाम के साथ Junction, Terminal, Central या Cantt जैसे शब्द सिर्फ नाम का हिस्सा नहीं होते, बल्कि वे स्टेशन की पहचान बताते हैं. इससे यात्रियों को यह समझने में आसानी होती है कि स्टेशन का रेलवे नेटवर्क में क्या महत्व है और वहां से ट्रेनों का संचालन किस तरह होता है.
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