JEE Main Topper: जईई परीक्षा रिजल्ट के बाद भुवनेश्वर के दो भाई चर्चा में आ गए. JEE Main 2026 सेशन 1 परीक्षा में दोनों भाई एक समान अंक मिले. वहीं इनकी स्टोरी कई मायने में दिलचस्प रहने के कारण जल्दी हाईलाइट हो गई. पहला कारण तो ये रहा कि दोनों भाई जुड़ावां हैं और दोनों ने एक साथ तैयारी शुरू की. दूसरा ये कि दोनों का रिजल्ट सेम है. अपने एक इंटरव्यू में इन्होंने कहा कि उनका पहला गोल IIT Bombay का है और फिर वे यूपीएससी क्रैक करके IAS बनना चाहेंगे. अब इस पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. कुछ इस बच्चे को दिशाहीन और ट्रेंड फॉलो करने वाला बता रहे हैं तो कोई इसे एजुकेशन सिस्टम की नाकामी के तौर पर देख रहा है. आइए, एक्सपर्ट से जानते हैं उनकी इस पर क्या राय है?
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस, IIT के बाद UPSC क्यों करना?
@aShubhamz नाम के एक X यूजर ने इस बच्चे का इंटरव्यू शेयर करते हुए लिखा, पहले एडवांस क्लियर करना है, IIT Bombay जाना है, फिर IAS बनना है. इंडियन एजुकेशन सिस्टम और इसके परिवार इस बच्चे को निराश कर चुके हैं. इस पर तरह-तरह के कॉमेंट्स आ रहे हैं. किसी ने कहा अगर IAS बनना है तो IIT क्यों जा रहा है? एक यूजर ने कहा कि ये कोई विजिन और पैशन वाला बच्चा नहीं है बल्कि इसके माता-पिता ने इसे ATM की तरह ट्रेन किया है.
वहीं कुछ लोग इस बच्चे के सपोर्ट में उतरे. कुछ ने कहा कि ये उसकी लाइफ है, उसे तय करने दो. वहीं, एक यूजर ने लिखा कि उसके माता पिता ने उसे ऐसा माहौल दिया है कि वे IIT Bombay और IAS बनने के सपने देख पा रहा है तो इसमें क्या हर्ज है?
IITs से पढ़कर निकले युवा अलग ऊर्जा से काम करते हैं
इस मामले को लेकर जब हमने धनबाद स्थित BBMKU और हजारीबाग स्थित Vinoba Bhave University के पूर्व VC पवन कुमार पोद्दार से बातचीत की तो उन्होंने कहा कि शिक्षा और डिग्री हासिल करना कोई गलत बात नहीं है. अगर कोई बच्चा IITs से पढ़ाई करके फिर प्रशासनिक सेवा में आता है तो वो उस एनर्जी और स्किल के साथ उस सेक्टर में काम करेगा. आज के समय में बिजनेसमैन भी पढ़ाई करके फिर बिजनेस करते हैं. आप देख सकते हैं कि IITs, IIMs से निकलकर युवा अपना बिजनेस शुरू करते हैं.
नया ट्रेंड नहीं, सालों से फॉलो होता आया है: प्रो. संजय कुमार सिंह
रांची यूनिवर्सिटी के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट के HOD सह एग्जाम कंट्रोलर प्रोफेसर संजय कुमार सिंह ने कहा कि ऐसा नहीं कि ये कोई नया ट्रेंड है कि IITs से पढ़ाई करने के बाद युवा सिविल सेवा में आ रहे हैं. 80 के दशक के आसपास ही ऐसा ट्रेंड शुरू हुआ था जो अभी तक चल रहा है. पहला कारण तो ये है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई से जल्दी सेटलमेंट हो जाता है और बैकअप ऑप्शन रहता है. ऐसे में बिना डर के युवा सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हैं.
समय और संसाधन की बर्बादी
वहीं उन्होंने इसका नुकसान भी बताया. कहा कि ऐसा करने वाले युवा IIT की एक सीट बर्बाद कर देते हैं, जो किसी जरूरतमंद के साथ नाइंसाफी है. ये चिंता का विषय है. ये चिंता का विषय है. सरकार के संसाधन की बर्बादी और बेरोजगारी को भी बूस्ट देता है. शायद यही कारण है कि सरकार ने 2026 से UPSC CSE परीक्षा में कई बदलवा किए हैं. राहत और सहूलियत को खत्म किया गया है.
रिसर्च और इस तरह के काम के लिए स्टूडेंट्स को करें मोटिवेट
वहीं जब हमने उनसे पूछा कि क्या IITs और IIMs जैसे संस्थान स्टूडेंट्स को UPSC जैसी परीक्षा क्रैक करने के लिए बेहतर माहौल देते हैं तो उन्होंने कहा कि इसमें माहौल का कोई विशेष रोल नहीं है. जिस बच्चे ने IIT क्रैक किया और वो ऐसे किसी संस्थान में पहुंचा, उसका बैकग्राउंड बहुत मजबूत हो जाता है. लंबे देर तक पढ़ने की आदत, पढ़ाई का लेवल हाई और ऐसे कई कारक हैं, जो उन्हें यूपीएससी जैसी परीक्षा के लिए तैयार करता है. हालांकि, उनका मानना है कि IITs जैसे संस्थान को स्टूडेंट को देश के लिए रिसर्च और ISRO, DRDO जैसे संस्थान के लिए काम करने के लिए प्रेरित करना चाहिए. युवाओं में देश सेवा की भावना विकसित करनी चाहिए.
JEE Main Topper: भुवनेश्वर के जुड़वां भाई, एक जैसे मार्क्स
यहां आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जेईई परीक्षा के रिजल्ट (JEE Main Topper) में भुवनेश्वर के जुड़वां भाई महरूफ और मस्रूर अहमद खान ने समान अंक हासिल किया है. दोनों भाइयों ने 300 में से 285 अंक प्राप्त किए हैं. दोनों कोटा में रहकर तैयारी कर रहे थे. बेटों की पढ़ाई के लिए इनकी मां भी सरकारी नौकरी छोड़कर कोटा शिफ्ट हो गई थीं.
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