17 LPA की नौकरी छोड़ी, IIIT दिल्ली से ग्रेजुएट युवक ने कहा सुकून ज्यादा जरूरी है

IIIT Delhi Graduate Quits Job: आईआईआईटी दिल्ली के एक युवक ने वर्क लाइफ बैलेंस को लेकर सोशल मीडिया पर एक रील शेयर की. उन्होंने बताया कि कैसे प्राइवेट बैंकिंग सेक्टर में काम करने से मेंटल हेल्थ पर असर पड़ता है.

IIIT Delhi Graduate Quits Job: एक ओर जहां युवा नौकरी पाने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं. वहीं दूसरी ओर IIIT ग्रेजुएट ने अपनी 17 लाख सालाना (LPA) वाली नौकरी छोड़ दी. इस युवक ने बैंक की नौकरी टॉक्सिक बताया और कहा कि वे सैलरी के लिए अपनी मेंटल पीस नहीं खराब कर सकते हैं.

क्या है पूरा मामला?

आईआईआईटी दिल्ली से पढ़ाई करने के बाद चिराग मदान बैंकिंग सेक्टर में काम करते हैं. वे सिर्फ 24 साल के हैं. उनकी सैलरी 17 लाख सालाना पैकेज की बताई जा रही है. शुरुआत में उन्हें यह नौकरी ड्रीम जॉब लग रही थी. लेकिन धीरे-धीरे उनका ये सपना टूट गया.

युवक ने रील शेयर करके बताया अपना दु:ख

चिराग ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर करते हुए बताया कि उन्हें दो बड़े कारण से इस नौकरी को छोड़ दी, जिसमें से एक है कल्चर और मिस सेल (Mis-sell). चिराग ने कहा कि उन्होंने सोचा था कि कॉर्पोरेट में 9-5 काम करने के बाद लाइफ सेट हो जाएगी. लेकिन उन्हें पता भी नहीं चला कि कब 9-5 जॉब 9-7 बन गई और 15-15 घंटे का काम हो गया. उन्होंने कहा कि लंच तक करने का टाइम नहीं था और छुट्टी लेने के लिए भी कई मेल करने होते थे, फिर भी नहीं मिलती थी.

चिराग ने कहा कि बैंकिंग सेक्टर में काम करते हुए उन्होंने देखा कि किस तरह कस्टमर को बेवकूफ बनाया जाता है. कई बार उन्हें कंपनी की ओर से ऐसी सर्विस की सिफारिश करनी पड़ती थी, जिसके लिए उनका मन नहीं मानता था. साथ ही कहा कि बैंकिंग सेक्टर में टारगेट का प्रेशर रहता है.

युवक ने मेंटल पीस को बताया ज्यादा जरूरी

IIIT Delhi से ग्रेजुएट, इस युवक ने कहा कि अच्छी सैलरी वाली नौकरी तो जरूरी है. लेकिन सबसे ज्यादा जरूरी है मेंटल पीस और इस सेक्टर में काम करते हुए ये बहुत प्रभावित हुआ है. उनका मानना है कि सुकून और हेल्थ किसी भी सैलरी से ज्यादा जरूरी है.

चिराग मदान की पोस्ट का स्क्रीनशॉट

सोशल मीडिया पर लोगों का रिएक्शन

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. कुछ लोग इसे साहसिक और सही फैसला बता रहे हैं वहीं कुछ का मानना है कि इतनी बड़ी सैलरी छोड़ना रिस्क लेने जैसा है. कुछ यूजर्स चिराग की कहानी से खुद को जोड़कर देख रहे हैं. चिराग के इस पोस्ट ने एक बार फिर कॉर्पोरेट जगत में वर्क-लाइफ बैलेंस का मुद्दा उठा दिया है.

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Published by: Shambhavi shivani

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