CBSE New Rule: सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) ने नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP 2020) और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCFSE 2023) के तहत स्कूली शिक्षा में बड़े बदलावों की घोषणा की है. पहले जहां सीबीएसई के स्टूडेंट्स को सिर्फ दो लैंग्वेज के सब्जेक्ट पढ़ने होते थे. वहीं अब उन्हें तीन लैंग्वेज (Three-Language Formula) पढ़ना होगा. CBSE ने थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला लागू किया है.
सीबीएसई का ये बड़ा बदलाव नए शैक्षणिक सत्र से लागू होगा. इस नए बदलाव का मकसद है कि छात्र अलग-अलग भाषाएं सीखें, भारत की भाषाओं को समझें और आसानी से एक से ज्यादा भाषाओं में बात कर सकें.
क्या है नया R1, R2 और R3 स्ट्रक्चर?
सीबीएसई ने साफ-साफ कहा है कि तीन भाषाओं में से कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की (Native to India) होनी चाहिए. CBSE ने थ्री लैंग्वेज फॉर्मूला को स्ट्रक्चर में बांटा है, R1, R2 और R3.
- R1 (पहली भाषा): छात्र CBSE द्वारा दी गई भाषाओं की लिस्ट में से कोई भी एक भाषा सेलेक्ट कर सकते हैं.
- R2 (दूसरी भाषा): यह भाषा R1 से अलग होनी चाहिए.
- R3 (तीसरी भाषा): यह भाषा R1 और R2 दोनों से अलग होनी चाहिए.
CBSE New Rule: कब से लागू होगा 3-भाषा वाला नियम?
CBSE नए अकैडमिक सेशन से इस नियम को लागू करने जा रहा है. लेकिन अचानकर से इसे फोर्स करने के बजाए, स्टेप-बाय-स्टेप लागू किया जाएगा. CBSE क्लास 6 से तीसरी भाषा R3 को अनिवार्य कर देगा. क्लास 9-10वीं के स्टूडेंट्स के लिए तीनों भाषा में पढ़ाई करना अनिवार्य होगा. हालांकि, दिव्यांग (PwD) छात्रों को एक भाषा में छूट दी जाएगी.
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