NEET UG Counselling 2026: नीट यूजी काउंसलिंग के लिए रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया 4 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है. मेडिकल काउंसलिंग कमेटी (MCC) की तरफ से जारी शेड्यूल के अनुसार, दूसरे राउंड की प्रक्रिया 24 अगस्त 2026 से शुरू होगी. अगर आप भी NEET काउंसलिंग रजिस्ट्रेशन करने वाले हैं तो ये आर्टिकल आपके काम की है.
NEET UG Counselling में AIQ और स्टेट कोटा है क्या?
सबसे पहले बेसिक बात समझ लेते हैं. गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेजों की सीटों को दो हिस्सों में बांटा जाता है.
- 15% सीटें AIQ यानी ऑल इंडिया कोटा में जाती हैं.
- 85% सीटें स्टेट कोटा में जाती हैं.
AIQ की काउंसलिंग MCC यानी मेडिकल काउंसलिंग कमेटी कराती है, जबकि स्टेट कोटा की काउंसलिंग हर राज्य की अपनी अथॉरिटी कराती है. जैसे महाराष्ट्र में DMER, कर्नाटक में KEA, यूपी में DGME-UP.
AIQ और स्टेट कोटा में अंतर एक नजर में
| पॉइंट | AIQ (ऑल इंडिया कोटा) | स्टेट कोटा |
| सीटों की हिस्सेदारी | 15% | 85% |
| काउंसलिंग कौन कराता है | MCC | राज्य की काउंसलिंग अथॉरिटी |
| डोमिसाइल जरूरी | नहीं | हां |
| कॉलेज का दायरा | पूरे देश के सरकारी मेडिकल कॉलेज (कुछ अपवादों को छोड़कर) | संबंधित राज्य के मेडिकल कॉलेज |
| कॉम्पिटिशन | नेशनल लेवल, ज्यादा टफ | राज्य के अंदर, तुलनात्मक रूप से आसान |
| रिजर्वेशन कैटेगरी | SC, ST, OBC-NCL, EWS आदि (केंद्रीय नियम) | राज्य सरकार के नियमों के अनुसार |
AIQ में कौन कर सकता है अप्लाई?
AIQ का सबसे बड़ा फायदा यही है कि इसमें डोमिसाइल यानी निवास प्रमाण की कोई शर्त नहीं होती.
- देश के किसी भी राज्य का स्टूडेंट अप्लाई कर सकता है.
- सिर्फ NEET UG क्वालिफाई होना जरूरी है.
- रजिस्ट्रेशन mcc.nic.in पोर्टल पर होता है.
- AIIMS, JIPMER, डीम्ड यूनिवर्सिटी और सेंट्रल इंस्टीट्यूट्स की सीटें भी इसी में आती हैं.
अगर आप बिहार के हैं और दिल्ली या तमिलनाडु के किसी गवर्नमेंट कॉलेज में एडमिशन चाहते हैं, तो वो सिर्फ AIQ के जरिए ही मुमकिन है.
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स्टेट कोटा में क्या है नियम?
स्टेट कोटा में सबसे जरूरी चीज है डोमिसाइल यानी आप उस राज्य के निवासी होने चाहिए-
- हर राज्य की अपनी डोमिसाइल पॉलिसी है.
- ज्यादातर राज्य 12वीं की पढ़ाई और रेजिडेंस के सालों को आधार बनाते हैं.
- कुछ राज्यों में पेरेंट्स की सरकारी नौकरी भी काउंट होती है.
- प्राइवेट कॉलेजों की ज्यादातर सीटें भी स्टेट कोटा के जरिए ही भरी जाती हैं.
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कटऑफ में फर्क क्यों होता है?
AIQ में देश भर के स्टूडेंट्स कॉम्पिटिशन करते हैं, इसलिए कटऑफ रैंक टाइट रहती है. वहीं स्टेट कोटा में सिर्फ उसी राज्य के डोमिसाइल वाले स्टूडेंट्स आपस में कॉम्पिटिशन करते हैं, इसलिए कई बार वहां कटऑफ थोड़ी रिलैक्स्ड हो जाती है. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स हमेशा सलाह देते हैं कि दोनों जगह रजिस्ट्रेशन जरूर कराएं.
क्या दोनों में एक साथ रजिस्ट्रेशन हो सकता है?
MCC पोर्टल पर AIQ के लिए अलग रजिस्ट्रेशन. अपने राज्य के पोर्टल पर स्टेट कोटा के लिए अलग रजिस्ट्रेशन. दोनों प्रोसेस पूरी तरह इंडिपेंडेंट और पैरेलल चलते हैं. अगर दोनों जगह सीट मिल जाए तो एक चुनकर दूसरी से रिजाइन करने का ऑप्शन रहता है.
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रिजर्वेशन कैटेगरी में भी है अंतर
ये बात बहुत कम लोग जानते हैं कि NEET UG में AIQ और स्टेट कोटा की रिजर्वेशन कैटेगरी एक जैसी नहीं होती. इसलिए रजिस्ट्रेशन से पहले अपने राज्य की रिजर्वेशन पॉलिसी जरूर चेक कर लें. नीचे कुछ उदाहरण दिए गए हैं-
- AIQ में सिर्फ SC, ST, OBC-NCL और EWS कैटेगरी चलती है.
- महाराष्ट्र जैसे राज्यों में SC, ST, NT, OBC, EWS जैसी सब-कैटेगरी हैं.
- तमिलनाडु में BC, MBC, DNC जैसी लोकल कैटेगरी हैं.
- कर्नाटक में GM, OBC, SC, ST का अपना सिस्टम है.
प्राइवेट कॉलेज की सीटों का क्या हिसाब
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में भी सीटों का बंटवारा होता है. ज्यादातर सीटें स्टेट कोटा के तहत आती हैं. कुछ सीटें इंस्टीट्यूशनल कोटा में जाती हैं, जो नॉन-डोमिसाइल स्टूडेंट्स के लिए भी खुली होती हैं. महाराष्ट्र जैसे क्लोज्ड स्टेट में सिर्फ डोमिसाइल वालों को ही स्टेट कोटा मिलता है.
रजिस्ट्रेशन शुरू होने के बाद जल्दबाजी में गलती न हो, इसके लिए इन बातों का ध्यान रखें. अपने राज्य की डोमिसाइल पॉलिसी पहले से पढ़ लें 12वीं की मार्कशीट, रेजिडेंस प्रूफ जैसे डॉक्यूमेंट्स तैयार रखें. MCC और स्टेट, दोनों पोर्टल की डेडलाइन नोट कर लें. फीस पेमेंट और च्वॉइस फिलिंग की डेट्स अलग-अलग हो सकती हैं इसलिए कन्फ्यूज न हों.
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