Strike: लेबर कोड के विरोध में देशव्यापी हड़ताल की तैयारी, फरवरी में होगा बड़ा आंदोलन

Strike: भारत के मजदूर संगठनों ने नए लेबर कोड के खिलाफ फरवरी 2026 में देशव्यापी हड़ताल का ऐलान किया है. संयुक्त ट्रेड यूनियनों ने कहा कि श्रम कानून कामगारों के अधिकार कमजोर करते हैं, इसलिए इन्हें वापस लेने तक चरणबद्ध संघर्ष जारी रहेगा. देशभर में गैर-यूनियन श्रमिकों और किसान संगठनों ने भी व्यापक विरोध दर्ज कराया है. इंडिगो विवाद और निजीकरण के बढ़ते असर पर भी चिंता जताई गई है. यह हड़ताल सरकार की नीतियों के खिलाफ बड़े आंदोलन का संकेत है.

Strike: देश के मजदूर संगठनों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए श्रम कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर व्यापक और निरंतर संघर्ष का ऐलान किया है. श्रमिक प्रतिनिधियों का कहना है कि इन कानूनों से कामगारों की सुरक्षा, अधिकार और सामाजिक रूप से कमजोर होंगे, इसलिए आंदोलन को और तेज किया जाएगा. अगले साल फरवरी 2026 में देशव्यापी हड़ताल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है.

संयुक्त ट्रेड यूनियनों की बैठक

आठ दिसंबर 2025 को केंद्रीय ट्रेड यूनियनों और क्षेत्रीय महासंघों के संयुक्त मंच की बैठक में श्रम कानूनों की अधिसूचना के बाद बने हालात पर विस्तार से चर्चा की गई. बैठक में यह बात सामने आई कि श्रमिक वर्ग ने बड़े पैमाने पर स्वतः विरोध दर्ज कराया, जिसके चलते सरकार लंबे समय से इन कानूनों को लागू नहीं कर पा रही थी. प्रतिनिधियों का मानना है कि यह विरोध श्रमिकों की एकजुटता और असंतोष को स्पष्ट दर्शाता है.

देशभर में विरोध की लहर

बयान में बताया गया कि श्रम कानूनों के खिलाफ देशभर में, विशेष रूप से कार्यस्थल स्तर पर, बड़े पैमाने पर प्रतिरोध प्रदर्शन हुए. गैर-यूनियन श्रमिकों और भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) से जुड़े कामगारों ने भी इन प्रदर्शनों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया. कई जगहों पर श्रम कानूनों की प्रतियां जलाकर सरकार की नीतियों के प्रति असंतोष प्रकट किया गया. 26 नवंबर 2025 को जिला और ब्लॉक मुख्यालयों से लेकर फैक्ट्रियों और दफ्तरों तक मजबूत लामबंदी देखने को मिली.

किसान संगठनों का समर्थन

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने भी श्रम कानूनों और बीज विधेयक का विरोध करते हुए बड़े पैमाने पर आंदोलन संगठित किया. ट्रेड यूनियनों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह श्रमिकों को गुमराह करने के लिए इन कानूनों के तथाकथित लाभों पर झूठा प्रचार कर रही है. उनका कहना है कि यह कानून पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाने वाले हैं और कामगारों की सुरक्षा को कमजोर करते हैं.

कॉरपोरेट दबदबे और इंडिगो विवाद पर चिंता

बैठक में इंडिगो एयरलाइन से जुड़ी घटनाओं पर भी चिंता जताई गई, जिसमें यात्रियों और कर्मचारियों को भारी परेशानी उठानी पड़ी. यूनियनों ने इसे कॉरपोरेट अहंकार और श्रम हितों की अनदेखी का उदाहरण बताया, साथ ही यह भी कहा कि निजीकरण के खतरों को लेकर उनकी चेतावनियां सही साबित हुई हैं.

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फरवरी 2026 की हड़ताल

संयुक्त मंच ने स्पष्ट किया है कि जब तक श्रम कानून पूरी तरह वापस नहीं लिए जाते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. फरवरी 2026 की देशव्यापी आम हड़ताल इसकी अगली बड़ी कड़ी होगी. इसके साथ ही, राज्य चैप्टर एक सप्ताह के भीतर विस्तृत रणनीति तैयार करेंगे और किसान संगठनों सहित अन्य सामाजिक समूहों के साथ समन्वय बढ़ाया जाएगा.

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By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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