Oil Price On 17 June 2026: इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से गिरकर तीन महीने के निचले स्तर पर आ गई हैं. ब्रेंट क्रूड 79 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 77 डॉलर के नीचे फिसल गया है. पिछले एक महीने में तेल की कीमतों में 27% तक की बड़ी गिरावट देखी गई है.
क्या अमेरिका-ईरान शांति समझौते का असर है?
इस गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला प्रस्तावित शांति समझौता है. खबरों के अनुसार, शुक्रवार तक एक अंतरिम समझौते पर हस्ताक्षर हो सकते हैं, जिससे ईरान के ऑयल एक्सपोर्ट पर लगी पाबंदियां हट सकती हैं. इससे ग्लोबल मार्केट में ईरानी तेल की नई आपूर्ति बढ़ेगी. साथ ही, समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोलने का वादा किया गया है, जो दुनिया की तेल सप्लाई का एक प्रमुख रास्ता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस समझौते को एक बेहतरीन दस्तावेज बताया है.
क्या अब घटेंगे भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम?
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी जरूर आई है, लेकिन इंडियन कंज्यूमर्स को तुरंत बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम है. इसका कारण यह है कि भारत की तेल कंपनियों ने पहले से ही ऊंचे दामों पर महंगा स्टॉक खरीद रखा है. इसलिए, जब तक पुराना महंगा स्टॉक खत्म नहीं होता, तब तक खुदरा कीमतों में बदलाव की संभावना कम ही दिख रही है.
क्या भविष्य में तेल के दाम और गिरेंगे?
बाजार में एक तरफ जहां ईरान से तेल आने की उम्मीद से कीमतों में गिरावट आई है. वहीं दूसरी ओर अमेरिकी क्रूड इन्वेंट्री (स्टॉक) में 8.3 मिलियन बैरल की कमी भी देखी गई है. अगर फ्यूचर में जियोपॉलिटिकल स्थिति स्थिर रहती है और आपूर्ति सामान्य होती है, तो तेल की कीमतें नीचे बनी रह सकती हैं. हालांकि, बाजार अभी भी बहुत अस्थिर है और आने वाले दिनों में शांति समझौते की हर अपडेट कीमतों पर असर डालेगी.
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