अदाणी ग्रुप के लिए हरित बजट के आरोपों को निर्मला सीतारमण ने किया खारिज, विपक्ष को दिया तगड़ा जवाब

निर्मला सीतारमण ने योजना में तरफदारी के आरोपों पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में तरफदारी नहीं की जाती. ऐसे बयान गलत हैं और सभी को पात्रता के आधार पर आवंटन किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि रिश्तेदारों, जीजाजी, भतीजा जी को फोन पर आवंटन की संस्कृति उनकी (कांग्रेस) रही है, हमारी नहीं.

नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को विपक्ष के उस आरोप को सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन पर अदाणी ग्रुप को ध्यान में रखकर हरित एवं स्वच्छ ऊर्जा बजट लाने की बात कही गई थी. इस आरोप का तगड़ा जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि ‘जीजाजी’ और ‘भतीजाजी’ को फायदा पहुंचाने की संस्कृति कांग्रेस की रही है, नरेंद्र मोदी सरकार की नहीं. निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2023-24 के बजट में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के लिए 35 हजार करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित किया है. इस क्षेत्र में अदाणी ग्रुप ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता से लेकर हरित हाइड्रोजन उत्पादन सहित अनेक परियोजनाओं की घोषणा की है.

हमारा न्यू इंडिया का सपना

बजट पर लोकसभा में चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि क्योंकि, मेरा नाम लेकर विपक्ष के एक नेता ने बोला कि क्या निर्मला सीतारमण ने हरित क्षेत्र में इतनी राशि आवंटित की, क्या इतनी राशि किसी को ध्यान में रखते हुए आवंटित की गयी है? उन्होंने कहा कि हमारा न्यू इंडिया का सपना है और प्रधानमंत्री का पूरा ध्यान सबका साथ, सबका विकास पर है. समावेशी विकास पर है. जो भी पात्र है, उसे लाभ मिलेगा.

मोदी सरकार में तरफदारी नहीं की जाती

निर्मला सीतारमण ने योजना में तरफदारी के आरोपों पर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की सरकार में तरफदारी नहीं की जाती. ऐसे बयान गलत हैं और सभी को पात्रता के आधार पर आवंटन किए जाते हैं. उन्होंने कहा कि रिश्तेदारों, जीजाजी, भतीजा जी को फोन पर आवंटन की संस्कृति उनकी (कांग्रेस) रही है, हमारी नहीं.

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अल्पसंख्यकों को लेकर कांग्रेस पर निशाना

अल्पसंख्यक मंत्रालय का बजट कम किए जाने के विपक्षी सदस्यों के दावों को खारिज करते हुए सीतारमण ने कहा कि बजट में किसी विभाग का आवंटन कम नहीं किया गया, यह बात वह आंकड़ें रखकर बता रही हैं और यह बजट किसी समुदाय के खिलाफ नहीं है. वित्त मंत्री ने 1983 की नेल्ली हिंसा और 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए तत्कालीन कांग्रेस नीत सरकार पर निशाना साधा और कहा कि उस समय इन घटनाओं में पीड़ित समुदायों के लिए बजट आवंटन क्या कम था, लेकिन फिर भी वे हिंसा का शिकार हो गए. उन्होंने कहा कि 1966 में दिल्ली में गोहत्या के विरोध में प्रदर्शन करने वाले साधुओं को प्रताड़ित किया गया और उस समय कांग्रेस की सरकार थी.

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By Kumarvishwat sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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