PNG Connection: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के कारण दुनियाभर में ईंधन की सप्लाई प्रभावित हो रही है. भारत भी इससे बचा नहीं है, लेकिन सरकार ने इस संकट को एक अवसर में बदल दिया है.
रसोई गैस (LPG) की बढ़ती कीमतों और सप्लाई की अनिश्चितता को देखते हुए अब भारतीयों का झुकाव पीएनजी (Piped Natural Gas) की ओर तेजी से बढ़ रहा है. पिछले मात्र पांच हफ्तों में 4 लाख से अधिक नए परिवार इस आधुनिक सिस्टम से जुड़े हैं.
क्यों कम हो रही है एलपीजी पर निर्भरता?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, पीएनजी को बढ़ावा देना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है. जब भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध या तनाव की स्थिति बनती है, एलपीजी के आयात में दिक्कतें आती हैं. पाइप वाली गैस (PNG) का नेटवर्क स्थानीय स्तर पर अधिक स्थिर होता है और इससे सिलेंडरों की बुकिंग या डिलीवरी का झंझट भी खत्म हो जाता है.
जरूरी सेक्टरों के लिए राहत की खबर
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भले ही वैश्विक परिस्थितियां कठिन हों, लेकिन भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी.
- कमर्शियल सप्लाई: अस्पतालों, होटलों और ढाबों के लिए कमर्शियल एलपीजी की आपूर्ति अब 70% तक सुधर चुकी है.
- खेती-किसानी: खाद (Fertiliser) उत्पादन के लिए गैस की सप्लाई 95% तक बहाल कर दी गई है, ताकि किसानों को यूरिया की कमी न हो.
- फार्मा और फूड: स्वास्थ्य सेवाओं और कोल्ड स्टोरेज जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को बिना किसी रुकावट के गैस सप्लाई करने के निर्देश दिए गए हैं.
प्रवासी मजदूरों और छात्रों के लिए ‘छोटा सिलेंडर’ संजीवनी
अक्सर मजदूरों और छात्रों को एलपीजी कनेक्शन लेने में कागजी कार्रवाई की समस्या होती है. सरकार ने अब 5 किलो वाले एलपीजी सिलेंडर के नियमों को बेहद आसान कर दिया है. सप्लाई दोगुनी होने से अब तक लगभग एक लाख सिलेंडर बेचे जा चुके हैं. इससे कम आय वाले वर्ग को ब्लैक मार्केटिंग से राहत मिली है.
रिफाइनरियां और क्रूड ऑयल का स्टॉक
सरकार ने देशवासियों को भरोसा दिलाया है कि भारत के पास कच्चे तेल (Crude Oil) का पर्याप्त भंडार मौजूद है. हमारी रिफाइनरियां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं. एक और बड़ी उपलब्धि यह है कि अब भारत अपनी जरूरत की 60% एलपीजी का उत्पादन खुद कर रहा है, जिससे विदेशी निर्भरता काफी कम हुई है.
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