ट्रंप के टैरिफ की निकल गई हवा! पहली और दूसरी तिमाही में भारत ने किया रिकॉर्डतोड़ निर्यात
India Exports: भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली दो तिमाहियों में रिकॉर्डतोड़ निर्यात कर ग्लोबल ट्रेड में अपनी मजबूत पकड़ दिखाई है. पहली और दूसरी तिमाही में कुल निर्यात 418.9 बिलियन डॉलर पहुंचा, जो अब तक का सबसे बड़ा एच1 प्रदर्शन है. स्मार्टफोन, एग्रीकल्चर और सर्विस सेक्टर ने इस बढ़त को मजबूती दी है. ट्रंप के टैरिफ का असर भी भारत की निर्यात रफ्तार को धीमा नहीं कर पाया.
India Exports: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से भारत पर लगाए गए भारी-भरकम 50% तक की टैरिफ की हवा निकलनी शुरू हो गई है. राष्ट्रपति पद का कार्यभार संभालने के बाद से ही डोनाल्ड ट्रंप टैरिफ लादने की धमकी दे रहे थे. उनकी ओर से भारी-भरकम टैरिफ लादने के बाद भी भारत के निर्यात क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली और दूसरी तिमाही में ऐतिहासिक प्रदर्शन किया है. यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है, जब वैश्विक व्यापार वातावरण भू-राजनीतिक तनाव, महंगाई, कमजोर मांग और सप्लाई-चेन की चुनौतियों से प्रभावित रहा है. इसके बावजूद भारत ने लगातार दोनों तिमाहियों में रिकॉर्डतोड़ एक्सपोर्ट हासिल करके विश्व को अपनी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और आर्थिक मजबूती का संदेश दिया है.
पहली तिमाही में 209 बिलियन डॉलर का निर्यात
समाचार एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल–जून 2025 की पहली तिमाही में भारत का कुल निर्यात (मर्चेंडाइज और सर्विसेज मिलाकर) 209 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया. यह पिछले वित्त वर्ष की उसी अवधि के 202.5 बिलियन डॉलर के आंकड़े से अधिक है. पहली तिमाही की यह तेजी साफ दिखाती है कि भारत की एक्सपोर्ट प्रतिस्पर्धा बढ़ी है. सप्लाई-चेन के आधुनिकीकरण, पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर के सुदृढ़ीकरण और ग्लोबल वैल्यू चेन के साथ मजबूत एकीकरण ने इस प्रदर्शन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
दूसरी तिमाही में भी बरकरार रही रफ्तार
दूसरी तिमाही (जुलाई–सितंबर 2025) में भारत का निर्यात और आगे बढ़कर 209.9 बिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच गया. यह भारत के ट्रेड इतिहास में किसी भी दूसरी तिमाही का अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है. पिछले वर्ष इसी तिमाही में भारत का निर्यात 193.2 बिलियन डॉलर था, यानी इस बार कमजोर वैश्विक मांग के बावजूद भारत ने मजबूत रिकवरी और वृद्धि दिखाई है. इस तिमाही की तेजी में स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स का बढ़ता निर्यात, बेहतर मानसून के कारण कृषि निर्यात में सुधार और आईटी और अन्य सर्विस एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी प्रमुख कारण हैं.
पहली छमाही में ऐतिहासिक प्रदर्शन
अप्रैल से सितंबर 2025 (वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही) के दौरान भारत का कुल निर्यात 418.9 बिलियन डॉलर रहा. यह 2024 की इसी अवधि के 395.7 बिलियन डॉलर के मुकाबले 5.86% की वृद्धि है. यह आंकड़ा भारत के इतिहास में अब तक का सबसे ज्यादा एच1 निर्यात प्रदर्शन है. यह साबित करता है कि भारत का एक्सपोर्ट इकोसिस्टम पिछले कुछ वर्षों में किए गए संरचनात्मक सुधारों का बड़ा लाभ उठा रहा है. इन सुधारों में लॉजिस्टिक्स और पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, एक्सपोर्ट प्रक्रियाओं को सरल बनाना, पीएलआई स्कीम के जरिए मैन्युफैक्चरिंग में प्रतिस्पर्धा बढ़ाना, उभरते सेक्टर्स के लिए टारगेटेड इंसेंटिव और ग्लोबल चुनौतियों के बीच भारत की बढ़त शामिल हैं.
कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कर रहीं सघंर्ष
कई बड़ी अर्थव्यवस्थाएं कम मांग, बढ़ी शिपिंग लागत और मुद्रा अस्थिरता के कारण संघर्ष कर रही हैं. उनकी निर्यात वृद्धि स्थिर या नकारात्मक रही है. इसके उलट भारत ने अपने विविध एक्सपोर्ट बास्केट, बढ़ते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर्स और तेजी से उभरते सर्विस सेक्टर की बदौलत मजबूत प्रदर्शन किया है. खासकर, पीएलआई स्कीम ने इलेक्ट्रॉनिक्स और फूड-प्रोसेसिंग जैसी कैटेगरीज में भारतीय उत्पादों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ा दी है. इसके साथ ही, सर्विस एक्सपोर्ट (आईटी, फिनटेक, कंसल्टिंग) भारत की निरंतर मजबूती का सबसे बड़ा आधार बने हुए हैं.
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भविष्य में और तेजी के संकेत
वित्त वर्ष 2025-26 में एच1 के मजबूत प्रदर्शन से संकेत मिलता है कि भारत आने वाली तिमाहियों में भी तेजी बनाए रख सकता है. एक्सपोर्टर्स के लिए लगातार नीतिगत समर्थन, वैश्विक बाजारों में भारत की बढ़ती विश्वसनीयता और व्यापारिक साझेदारियों का विस्तार निर्यात को और गति देगा. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अमेरिका में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए टैरिफ भारत के कुल निर्यात प्रदर्शन को प्रभावित नहीं कर सके. इसके उलट, भारत ने लगातार दो तिमाहियों में रिकॉर्ड बनाकर दिखा दिया कि वह वैश्विक व्यापार में मजबूत और भरोसेमंद पार्टनर के रूप में तेजी से उभर रहा है.
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