Petrol Diesel Price: अभी मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बहुत ज्यादा है. हालांकि ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज जलमार्ग (समुद्री रास्ता) बंद नहीं करेगा, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है. लेकिन विशेषज्ञ अभी भी कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में उछाल की आशंका जता रहे हैं. यदि तनाव बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल $100 प्रति बैरल का आंकड़ा पार कर सकता है.
कीमतें बढ़ने के 3 मुख्य कारण
- अघोषित रुकावट: ईरान आधिकारिक तौर पर रास्ता बंद न भी करे, तो भी ऑयल टैंकर्स पर हमलों से डर पैदा होगा. अगर शिपिंग कंपनियां असुरक्षा के कारण इस रास्ते से कतराती हैं, तो सप्लाई चेन तकनीकी रूप से बाधित हो जाएगी.
- बढ़ती लागत: युद्ध के जोखिम को देखते हुए जहाजों का ‘वॉर रिस्क इंश्योरेंस’ और माल ढुलाई (Freight) का खर्च बढ़ जाता है. यह अतिरिक्त बोझ अंततः तेल की कीमतों में जुड़ता है.
- बाजार की घबराहट (Market Panic): वैश्विक बाजार वास्तविक सप्लाई से ज्यादा भविष्य की आशंकाओं पर चलता है. मिडिल ईस्ट में अस्थिरता रहने तक कीमतों में अनिश्चितता बनी रहेगी.
भारत पर क्या असर पड़ेगा ?
भारत अपनी तेल जरूरतों का 90% आयात करता है, जिसमें से आधा हिस्सा इसी होर्मुज रास्ते से आता है. सप्लाई में हल्की सी भी बाधा भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकती है.
- महंगाई: अगर तनाव बढ़ा, तो कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल तक जा सकती है.
- जेब पर असर: इससे भारत में पेट्रोल ₹4-5 रुपए महंगा हो सकता है. यानी दिल्ली में पेट्रोल जो अभी लगभग ₹95 है, वह ₹100 तक जा सकता है और डीजल भी ₹92 के आसपास पहुंच सकता है.
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